अशोक मिश्र
मुंबई में 18 अक्टूबर को अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी हुई। घटना के बाद लारेंस गैंग से जुड़े अनिल पंडित ने जिम्मेदारी लेने वाले आॅडियो जारी किए। इससे यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि जेल की सलाखों के पीछे बैठे व्यक्ति का नेटवर्क कैसे सक्रिय रहता है। लॉरेंस बिश्नोई गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी सेल में कई वर्षों से बंद है। गृह मंत्रालय के आदेश के तहत उसे जेल परिसर से बाहर नहीं निकाला जा सकता है। सभी पूछताछ या कोर्ट की पेशी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही होती है। फिर भी उसका नाम बार-बार हत्या, धमकियों और हमलों में सामने आता रहता है। ऐसा क्यों होता है?जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक गैंग का दैनिक संचालन अब एक तरह की शैडो कैबिनेट के जरिए हो रहा है। इसमें टायसन बिश्नोई, अनिल पंडित, हरि बॉक्सर, हरमन संधू और हिमांशु सोनीपत जैसे सहयोगी शामिल बताए जाते हैं। ये लोग अमेरिका, कनाडा और यूरोप के विभिन्न ठिकानों से एन्क्रिप्टेड ऐप्स जैसे सिग्नल, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम के माध्यम से स्थानीय शूटरों को निर्देश देते हैं।
अमेरिकी न्याय विभाग ने अपनी चार्जशीट में इसे 'बिश्नोई आॅर्गनाइज्ड क्राइम ग्रुप' कहा है और बताया है कि यह अब एक इंटरनेशनल क्राइम सिंडिकेट में बदल चुका है। इस सिंडिकेट का सबसे ताजा और चौंकाने वाला चेहरा है अनिल पंडित। पानीपत का रहने वाला यह 32 साल का गैंगस्टर इन दिनों अमेरिका के कैलिफोर्निया में बैठकर दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक एक्सटोर्शन सिंडिकेट आॅपरेट कर रहा है। बिश्नोई जेल में तस्करी से लाए गए मोबाइल और वीओआईपी उपकरणों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हत्या, वसूली, ड्रग तस्करी और अन्य अपराधों का निर्देशन करता रहता है।
इसका नेटवर्क भारत के कई राज्यों में फैला हुआ है। इसमें सैकड़ों शार्पशूटर बताए जाते हैं। विदेश में रह रहे सहयोगी छात्र वीजा या अन्य रास्तों से युवाओं की भर्ती, हथियारों की सप्लाई और धन हस्तांतरण की व्यवस्था करते हैं। अमेरिका या कनाडा में बैठा हैंडलर सोशल मीडिया पर धमकी भरी पोस्ट डालता है, भारत में बैठे लोकल शूटर को टारगेट और हथियार का लोकेशन व्हाट्सएप या सिग्नल पर भेजा जाता है, और फिरौती न देने पर दिनदहाड़े फायरिंग करवा दी जाती है। पैसे का लेनदेन हवाला और क्रिप्टो के जरिए होता है ताकि ट्रेस न हो सके।
सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती सिर्फ जेल के अंदर की निगरानी बढ़ाने की नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से इस पूरे ट्रांसनेशनल नेटवर्क को तोड़ने की है। कानूनी प्रक्रिया को तेज और मजबूत बनाना होगा। गवाह अक्सर डर की वजह से मुकर जाते हैं, इसलिए गवाह सुरक्षा कार्यक्रम को जमीन पर लागू करना, कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से गवाही, और संगठित अपराध के लिए मकोका जैसे सख्त कानूनों के तहत चार्जशीट को मजबूत बनाना जरूरी है।


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