Thursday, October 22, 2026

पंजाब-हरियाणा को मिलकर नशे के खिलाफ चलाना होगा अभियान

अशोक मिश्र

इन दिनों पंजाब में नशीले पदार्थों का विरोध करने वाले तीन लोगों की हत्या का मामला काफी गरमाया हुआ है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने विजयादशमी के दिन कहा कि पंजाब में चिट्टा दहन होगा। ड्रग माफिया को पंजाब में सरकार बनने के बाद खोज निकालेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी गाहे-बगाहे पंजाब में बिकने वाले नशीले पदार्थों को लेकर मान सरकार पर हमलावर रहते हैं। सच कहा जाए, तो नशीले पदार्थों की वजह से पंजाब और हरियाणा दोनों परेशान हैं। पंजाब और हरियाणा में नशे का कारोबार लंबे समय से एक गंभीर सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी समस्या बना हुआ है। 

पंजाब विशेष रूप से समस्या के केंद्र में रहा है। यह पाकिस्तान के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। गोल्डन क्रिसेंट रूट से आने वाले हेरोइन के मुख्य प्रवेश मार्गों में से एक है।  राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों के अनुसार पंजाब ड्रग तस्करी के मामलों में देश में सबसे आगे रहा है। अफगानिस्तान में उत्पादित हेरोइन और अफीम का एक बड़ा हिस्सा तस्करी के जरिए पंजाब आता है। यह वही रास्ता है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्डन क्रिसेंट रूट कहा जाता है। ड्रोन, पाइपलाइन, नदी के रास्ते और सीमा पार सुरंगों जैसे नए तरीकों से पिछले कुछ सालों में तस्करी के तरीके और ज्यादा संगठित हुए हैं। 

एक बार पंजाब में दाखिल होने के बाद नशीले पदार्थों की खेप का एक हिस्सा स्थानीय खपत में चला जाता है। इसका एक बड़ा हिस्सा हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल और राजस्थान की तरफ भेज दिया जाता है। हरियाणा इस पूरे नेटवर्क में सिर्फ एक ट्रांजिट रूट नहीं रहा, बल्कि पिछले आठ-दस सालों में खुद एक बड़ा बाजार बन गया है। सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, अंबाला, पानीपत, कुरुक्षेत्र और पंचकूला जैसे जिले हेरोइन और अन्य नशीले पदार्थों के हॉटस्पॉट बने हुए हैं। 

हरियाणा राज्य नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अध्ययनों से पता चलता है कि यहां विभिन्न राज्यों से गांजा, चरस, अफीम, पोस्ता भूसी और सिंथेटिक ड्रग्स पहुंचते हैं। हाल के वर्षों में हरियाणा में भी एनडीपीएस अधिनियम के तहत हजारों मामले दर्ज हुए हैं। सैकड़ों किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए हैं। राज्य पुलिस ने दर्जनों ड्रग कारोबारियों की पहचान की है। डार्क वेब तथा क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लेन-देन पर भी नजर रखी जा रही है। दोनों राज्यों में यह समस्या केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य, परिवारों की बर्बादी और सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करने वाला संकट है। 

बेरोजगारी, सीमा की भौगोलिक स्थिति और संगठित गिरोहों की सक्रियता ने इस कारोबार को बनाए रखा है। पंजाब और हरियाणा दोनों ही इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र और पड़ोसी राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ा जा सके और नशे की लत से प्रभावित लोगों के पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा सके।

No comments:

Post a Comment