Tuesday, October 27, 2026

बौद्ध धर्म के सबसे बड़े प्रचारक कुमार जीव


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार में बिहार में जन्मे कुमार जीव का बहुत बड़ा योगदान है। बौद्ध साहित्य में इनके बारे में बहुत सारी जानकारियां दी गई हैं। बिहार में जन्मे कुमार जीव बहुत ही प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। समय आने पर वह नालंदा विश्वविद्यालय में पढ़ने गए। ज्ञान हासिल करने की भूख इन्हें तक्षशिला तक ले गई। यहां इन्होंने शिक्षा हासिल की और बाद में अध्यापन कार्य भी यहीं किया। तक्षशिला में अध्यापन के दौरान ही इन्होंने निश्चय किया कि प्रकृति प्रदत्त इस प्रतिभा का उपयोग धर्म के प्रचार-प्रसार में करना चाहिए। 

उन्होंने बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया और उन्होंने तक्षशिला के आसपास के राज्यों और देशों में बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। इसके लिए इन्हें कई एशियाई भाषा को भी सीखना पड़ा। बाद में इन्होंने तय किया कि उन्हें चीन जाकर बौद्ध धर्म का प्रचार करना चाहिए। एक लंबी और कठिन यात्रा करके कुमार जीव चीन पहुंचे। उन्होंने चीनी भाषा मंदारिन सीखी और अनेक बौद्ध ग्रंथों का चीनी भाषा में अनुवाद भी किया। वह लोगों के बीच जाते और उन्हें उनकी ही भाषा में बौद्ध धर्म के बारे में बताते थे।

 महात्मा बुद्ध के उपदेश और जीवन चरित बताते थे। इससे धीरे-धीरे चीन में बौद्ध धर्म का प्रसार होने लगा। उन्होंने इस काम में चीन के कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों और राजाओं का सहयोग भी हासिल किया। लेकिन यह सब कुछ बहुत आसान भी नहीं रहा। कई बार कुमार जीव को बहुत बड़ा जोखिम भी उठाना पड़ा। 

चीन में भी इन्हें बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विरोधियों का सामना करना पड़ा। लेकिन कुमार जीव अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि कालांतर में यह चीन में बौद्ध धर्म के सबसे बड़े प्रचारक साबित हुए और लोगों ने इन्हें स्वीकार भी कर लिया।

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