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Friday, May 22, 2026

युवाओं में घटती सहनशीलता समाज के लिए एक चेतावनी

अशोक मिश्र

युवाओं में संयम घटता जा रहा है। वह थोड़ी थोड़ी सी बात पर उत्तेजित हो रहे हैं। इसी उत्तेजना में वह ऐसे कदम भी उठा रहे हैं जिससे उनके जीवन को खतरा पैदा हो रहा है। माता-पिता या परिवार के किसी सदस्य की किसी बात पर नाराज युवा आत्महत्या तक कर रहे हैं। फरीदाबाद के पल्ला निवासी एक युवक ने आगरा नहर में केवल इसलिए छलांग लगा दी क्योंकि उसकी मां ने बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से मनाकर दिया था। 

मां का कहना है कि इतनी गर्मी में बाजार से लाए छोले-भटूरे को खाने से तबीयत खराब हो सकती है। इसके बाद युवक घर से निकला और उसने आगरा नहर में छलांग लगा दी। आगरा नहर में छलांग लगाने के बाद परिवार वालों ने पुलिस को फोन किया। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने लापरवाही बरती। काफी देर तक गोताखोरों की व्यवस्था नहीं हो पाई। युवक या उसके शव को पुलिस बरामद नहीं कर सकी है। 

युवक कुछ दिनों से मोबाइल फोन को लेकर परिवार वालों से नाराज था। यह घटना इस बात की बानगी है कि युवाओं में सहनशीलता लगातार घट रही है। इसका कारण पिछले कई दशक से लगातार बढ़ती बेरोजगारी, अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव, अनिश्चित भविष्य और परिजनों के साथ लगातार घटता संवाद आदि है। युवाओं में थोड़ी-थोड़ी बात पर उत्तेजित होने या गुस्सा आने का कारण आधुनिक जीवनशैली, डिजिटल तनाव, मनोवैज्ञानिक बदलाव और सामाजिक दबाव का एक जटिल मिश्रण है। 

जीवन शैली में आए बदलाव ने युवाओं को काफी प्रभावित किया है। आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया से काफी जुड़ी हुई है। सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट पर तत्काल प्रतिक्रिया आती है। लाइक्स और कमेंट की  भरमार देखते ही देखते हो जाती है। ज्यादातर सोशल मीडिया पर अपना समय बिताने की वजह से एक तरह की अधीरता युवाओं में पैदा होती जाती है। ऐसे में यदि परिवार उनके मन के मुताबिक व्यवहार नहीं करता है, तो वह आत्मघाती कदम उठा लेते हैं। आज के युवाओं पर बहुत जल्दी सफल होने, अच्छा करियर बनाने और सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने का भारी दबाव होता है। 

जब वे अपनी उम्मीदों के अनुसार परिणाम प्राप्त नहीं कर पाते, तो उनके अंदर निराशा और कुंठा जन्म लेती है, जो अक्सर गुस्से के रूप में बाहर आती है। यह गुस्सा कई बार परिवार और खुद युवाओं के लिए घातक साबित होता है। संयुक्त परिवारों के टूटने और एकाकी जीवन की वजह से भी युवाओं में सहनशीलता कम होती जा रही है। सामाजिक दबाव बढ़ने के कारण युवाओं में विपरीत परिस्थितियों या असहमति को स्वीकार करने की क्षमता कम हो गई है। छोटी-मोटी विफलताएं या किसी की बात न मानना उन्हें व्यक्तिगत अपमान जैसा महसूस होने लगता है और वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।