बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
हमें अपने जीवन में केवल उस आदमी पर विश्वास करना चाहिए जो आपकी परेशानी सुनकर आपकी मदद करे और किसी दूसरे के सामने उसका जिक्र तक न करे। इस संबंध में एक रोचक कथा है। किसी राज्य में गुरुकुल में उस सत्र के शिष्यों की पढ़ाई का आखिरी दिन था।सारे शिष्य बहुत प्रसन्न थे कि अब उन्हें घर जाने को मिलेगा। बस, कुलपति का अंतिम उपदेश देना बाकी था जो शिक्षा सत्र खत्म होने का अनिवार्य अंग था। सारे शिष्य एक जगह उपस्थित थे। तभी वहां पर कुलपति भी आ गए। उन्होंने लकड़ी के बने हुए तीन गुड्डे देते हुए कहा कि तुम्हें इनमें अंतर बताना है। सबने उन तीनों गुड्डों को देखा, लेकिन अंतर नहीं बता सके।
तभी एक शिष्य ने कहा कि अरे, इन गुड्डों में तो छेद है। तब कुलपति ने कहा कि सही बात है। उन्होंने एक तार देते हुए कहा कि इन तीनो गुड्डों के छेद में डालो। एक गुड्डे के कान के पास छेद था। उसमें तार डालने पर वह दूसरे कान से बाहर निकल गया। दूसरे गुड्डे के कान में तार डालने पर मुंह से तार निकल गया। तीसरे गुड्डे के कान में तार डालने पर वह कहीं से नहीं निकला। न कान से, न मुंह से, वह पेट में चला गया।
तब कुलपति ने कहा कि तुम सबके जीवन में तीन तरह के लोग मिलेंगे। एक तो इस कान से सुनेंगे और दूसरे कान से निकाल देंगे। तुम्हें ऐसे लोगों पर विश्वास नहीं करना है। दूसरे तरह के वह लोग होंगे जो आपकी बात सुनेंगे और दूसरों को बताएंगे। तुम्हें ऐसे लोगों से भी दूर रहना है।
तीसरे तरह के लोग आपकी समस्या को सुनेंगे, संभव होगा तो मदद करेंगे और पेट में रख लेंगे। किसी से बताएंगे नहीं। तुम्हें ऐसे ही लोगों पर विश्वास करना है। इसके बाद कुलपति ने सबको घर जाने की इजाजत दे दी।
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