Tuesday, June 23, 2026

जल भंडार नहीं बचाया तो भविष्य में झेलना पड़ेगा गंभीर जल संकट

अशोक मिश्र

राष्ट्रीय भूजल सर्वेक्षण के ताजा आंकड़े बहुत डराने वाले हैं। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान की हालत आंकड़ों के मुताबिक काफी खराब हो चुकी है। देश में भूजल संकट के सबसे बड़े हॉटस्पॉट यही तीनों राज्य हैं। अगर हालात पर बहुत जल्दी काबू नहीं पाया गया, तो आने वाले वर्षों में इन तीनों राज्यों की जनता पानी के लिए त्राहि-त्राहि करेगी और सरकार कुछ नहीं कर पाएगी। हरियाणा में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है। प्रदेश में हर साल 14 अरब घन मीटर पानी की कमी हो रही है। 

राज्य साल दर साल सूखता जा रहा है। राज्य की औसत भूजल दोहन दर 135.96 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। कुरुक्षेत्र जैसे जिलों में भूजल दोहन की दर रिकॉर्ड 228 प्रतिशत तक पहुंच गई है। शहर में भूजल की उपलब्धता काफी चिंताजनक है। शहरों में पानी की कुल मांग दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। गर्मी के दिनों हालात इतने बदतर हो जाते हैं कि लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करना स्थानीय निकायों के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। लोगों को पीने का पानी भी टैंकरों से खरीदना पड़ता है। हरियाणा में शहर ही नहीं, 7,287 गांवों में से 3,041 गांव जल संकट से जूझ रहे हैं।

राज्य के कुल 141 ब्लॉकों में से 91 ब्लॉक अत्यधिक शोषित श्रेणी में आ गए हैं। 14 जिलों में पानी का स्तर 30 मीटर से भी ज्यादा नीचे गिर चुका है। प्रदेश की वार्षिक जल मांग लगभग 34.96 लाख करोड़ लीटर है, जबकि उपलब्ध जल भंडार सिर्फ 20.93 लाख करोड़ लीटर ही है। विशेषज्ञों का मनाना है कि हरियाणा में गंभीर जल संकट के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार खेतों में लगे ट्यूबवेल हैं। किसान इन कृषि ट्यूबवेलों का अंधाधुंध उपयोग करके बहुत सारा पानी बरबाद कर देते हैं। खेतों में जरूरत से कहीं ज्यादा पानी भर देते हैं जिसकी वजह से गर्मी के मौसम में बहुत सारा पानी वाष्पित हो जाता है। 

हरियाणा में वर्षा जल का संचयन भी कम हो पाता है। वैसे बरसात भी अन्य राज्यों की अपेक्षा कम होती है जिसकी वजह से भूजल रिचार्ज दर भी काफी कम है। राज्य में तेज होता शहरीकरण और अत्यधिक जनसंख्या का दबाव पानी के उपयोग को बढ़ावा दे रहा है। राज्य के जिलों में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों में भी पानी की भारी खपत होती है जिसकी वजह से भूजल स्तर काफी गिरता जा रहा है। 

गंभीर पानी संकट से बचने का एक ही उपाय है कि प्रदेश के किसान, उद्योगपति और नागरिक प्रदेश सरकार की नीतियों पर अमल करें। पानी का उपयोग करें, लेकिन उसे बरबाद होने से हर हालत में बचाएं। जहां तक संभव हो, बरसात के पानी का संरक्षण करें। इसके लिए जरूरी है कि सौ वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में बने मकानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाएं। यदि वर्षा जल को बचाया नहीं गया, तो आने वाले दिनों भीषण जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है।

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