अशोक मिश्र
अगर किसी ने कोई पाप किया है, उसके पापों के परिणाम से छुटकारा पोप या चर्च नहीं दे सकते हैं। दुनिया में अगर किसी के पापों के लिए कोई माफी या सजा दे सकता है, तो वह ईसा ही पाप मुक्ति दे हैं। जर्मन संन्यासी, पादरी और धर्म प्रचारक मार्टिन लूथर ने खुलेआम पोप की आलोचना करते हुए यह बात कही थी। संन्यासी मार्टिन लूथर का जन्म 1483 को जर्मनी में हुआ था।उनके पिता हैंस लूथर एक खदान में मजदूर थे। हैंस लूथर के आठ बच्चे थे जिसमें मार्टिन दूसरे थे। उन्होंने चर्च के पादरियों के अविवाहित रहने का भी विरोध किया। और सन 1524 ई. में उन्होंने कैथरिन बोरा से विवाह किया। तब तक रोम सन 1520 में लूथर का कैथोलिक चर्च से बहिष्कार की घोषणा कर चुका था। इस बहिष्कार के बाद ही वह एक नए संप्रदाय का नेतृत्व करने लगे थे।
इससे जर्मनी के लोग उनसे काफी नाराज रहते थे। वह जहां भी जाते उनका विरोध किया जाता था। एक बार की बात है। वह अपने शिष्यों के साथ कहीं जा रहे थे। उनकी धर्म की नई व्याख्या से नाराज लोगों ने उन पर और उनके शिष्यों का विरोध किया। इस दौरान उन पर पत्थर भी फेंके गए। वह लोग जहां भी जाते थे, लोग उनका विरोध करने के लिए आ खड़े होते थे।
इससे परेशान एक शिष्य ने लूथर से कहा कि इन लोगों को इनकी ही भाषा में जवाब देना चाहिए। संत लूथर ने कहा कि यदि हम भी उनके जैसा ही व्यवहार करने लगे, तो फिर उनमें और हम में क्या फर्क रह जाएगा। वे हमसे नाराज हैं। हम अपने प्रेम, सद्भाव और सहिष्णुता से ही उनके क्रोध को कम या समाप्त कर सकते हैं। यह सुनकर शिष्यों को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने हिंसा न करने का संकल्प लिया।
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