Monday, June 22, 2026

मछली ने भुगता जिद करने का परिणाम

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

जिद हमेशा नुकसानदायक होती है। यदि कोई किसी काम से होने वाले नुकसान के बारे में बताए, तो उसकी बात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। यदि बताने वाले व्यक्ति की बात सही लगे, तो उस पर अमल करना चाहिए। ऐसे मामले में जिद नहीं करनी चाहिए। जिद करने से हमेशा नुकसान ही होता है। 

हठधर्मिता हर मामले में काम नहीं आती है। किसी गांव के तालाब में तीन मछलियां रहती थीं। इन तीनों मछलियों का जन्म भी इसी तालाब में हुआ था। एक ही तालाब में रहने की वजह से तीनों में काफी गहरी दोस्ती थी। इनमें से एक मछली काफी तेज तर्रार और बुद्धिमान थी। 

वह अपनी सहेलियों को समय-समय पर चेताती रहती थी ताकि वे किसी मुसीबत में न फंस जाएं। दूसरी मछली बुद्धिमान मछली से कम बुद्धि वाली थी। लेकिन उसे मूर्ख नहीं कहा जा सकता था। वह पहली मछली की बात मानती थी, लेकिन बात मानने से पहले वह अच्छी तरह से विचार कर लेती थी। उसे बुद्धिमान मछली की बातें अच्छी और सच्ची लगती थीं। 

तीसरी मछली काफी जिद्दी थी। वह अपनी ही धुन में लगी रहती थी। कई बार वह अपनी जिद की वजह से मुसीबत में फंसते-फंसते बची थी। लेकिन हर बार बुद्धिमान मछली ने उसे किसी न किसी तरह से बचाया था। इसके बावजूद उसकी आदत नहीं बदली थी। एक दिन बुद्धिमान मछली ने देखा कि तालाब के किनारे मछुआरा आया हुआ है। 

बुद्धिमान मछली ने अपनी दोनों सहेलियों को सचेत किया और तालाब के कोने में जाने से मनाकर दिया। जिद्दी मछली ने उसकी बात नहीं सुनी। वह जैसे ही तालाब में गई मछुआरे के फैलाए जाल में फंस गई। अब जिद्दी मछली पछताने लगी, लेकिन अब क्या किया जा सकता था। जिद्दी मछली ने लाख प्रयास किया, लेकिन जाल से बाहर न आ सकी।

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