Monday, June 22, 2026

फुटपाथ पर चलने का अधिकार लोगों को दिलाएगा कौन?

अशोक मिश्र

सड़कों पर पैदल चलने वालों का सुरक्षित घर पहुंचना भी करिश्मा है। सड़क हो, मेट्रो स्टेशन हो या रेलवे स्टेशन इनके अगल-बगल से गुजरने वाली सड़कों से फुटपाथ अक्सर गायब होता है। ऐसा नहीं है कि फुटपाथ बनाए नहीं जाते हैं। बनाए जाते हैं, लेकिन इन पर रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा होता है। दुकानदार अपनी दुकान के सामने सामान सजाकर बैठ जाते हैं जिससे पैदल चलने वालों के लिए जगही नहीं बचती है। पैदल चलने वालों को मजबूर होकर उस सड़क पर चलना पड़ता है जिस पर तेज रफ्तार गाड़ियां आ जा रही होती हैं। 

ऐसे में कई बार हादसे भी होते हैं। इन हादसों में कुछ लोग घायल होते हैं, तो कुछ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। कई जगहों पर फुटपाथ टूटे-फूटे होते हैं, चलने लायक ही नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में पैदल चलने वाला कहां जाए। उसके पास एक ही विकल्प बचता है, सड़क पर चले। इन्हीं सब परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 19 जून 2026 को सुप्रीमकोर्ट की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि  पैदल चलने का अधिकार संविधान के भाग-3 में दिए गए मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। 

अदालत ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षित और बाधा रहित फुटपाथ पर चलना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है, जिसे मोटर वाहनों की सुविधा से पहले संरक्षण मिलना चाहिए। सवाल उठता है कि पैदल चलने वालों के मौलिक अधिकारों की रक्षा कौन करेगा। यह जिम्मेदारी राज्य सरकार के अधीन आने वाले शहरी विकास प्राधिकरणों, नगर निगमों, नगरपालिकाओं और पंचायतों की है। इन संस्थाओं को फुटपाथों का निर्माण, रखरखाव और अतिक्रमण से सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी, क्योंकि पैदल चलना सम्मानजनक और सुरक्षित जीवन का अभिन्न हिस्सा है। इस अधिकार की रक्षा करना सरकारों की संवैधानिक जिम्मेदारी होगी। यदि किसी नागरिक को सुरक्षित फुटपाथ उपलब्ध नहीं कराया जाता या उसके इस अधिकार का उल्लंघन होता है, तो वह संविधान और अन्य कानूनों के तहत अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है। 

वैसे तो राज्य सरकार के अधीन काम करने वाली संस्थाएं सुप्रीमकोर्ट के फैसले से पहले भी फुटपाथों पर हुए अतिक्रमण को हटाने का काम करती रही हैं। स्थानीय निकायों द्वारा अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाए जाते रहे हैं, लेकिन फुटपाथों पर से रेहड़ी-पटरी को हटाया गया, फुटपाथ पर रखे दुकानदारों के सामान को जब्त किया गया,  कुछ ही समय बाद हालात पहले जैसे हो जाते हैं। 

इधर अतिक्रमण हटाने वाले गए, उधर फिर फुटपाथ पर रेहड़ी पटरी वालों ने कब्जा कर लिया। जैसे ही अतिक्रमण विरोधी अभियान शुरू होता है, खबर फैलते ही सारे कब्जाधारी सतर्क हो जाते हैं। अभियान चलाने वालों को कब्जे दिखाई ही नहीं देते हैं, लेकिन उनके जाते ही फिर फुटपाथ पर दुकानें सज जाती हैं।

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