Sunday, June 21, 2026

हरियाणा में वर्षा जल संचयन के लिए सबको करनी होगी कोशिश

अशोक मिश्र

उत्तर भारत में मानसून आने में बस कुछ ही दिन बचे हैं। वैसे भी हरियाणा के कुछ जिलों में छिटपुट बरसात हो भी रही है। प्रदेश सरकार ने राज्य में जलभराव रोकने के लिए नाले, नालियों और सीवरेज सिस्टम आदि की सफाई करने के आदेश बहुत पहले ही दे दिए थे। सभी जिलों में इस पर काम चल भी रहा है। कुछ जिलों में काम पूरा हो गया है, तो कुछ जिलों में अभी काम जारी है। 

वहीं, बरसात के दिनों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए भी कई योजनाओं पर काम हो रहा है। राज्य सरकार ने सौ वर्ग मीटर या इससे अधिक छत वाले वाले प्लाट पर बने मकान के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर रखा है। इसके बाद भी ज्यादातर ऐसे मकानों में या तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगे ही नहीं है या फिर दिखावे के लिए बीस-पच्चीस मीटर गहरा पाइप लगाकर खानापूर्ति कर ली गई है। इससे वर्षा जल ऊपरी सतह में ही रह जा रहा है और भूगर्भ जल रिचार्ज नहीं हो पा रहा है। 

हरियाणा जैसे प्रदेश की आज हालत यह है कि राज्य में हर साल 14 अरब घन मीटर पानी की कमी हो रही है। राज्य साल दर साल सूखता जा रहा है। शहर में भूजल की उपलब्धता कम होती जा रही है और पानी की कुल मांग बढ़ती जा रही है, जिससे लोगों की पानी की जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। राज्य के 7,287 गांवों में से 3,041 गांव जल संकट से जूझ रहे हैं। यदि वर्षा जल को नदियों में मिलने से बचाया नहीं गया, तो आने वाले दिनों हालात और भी बदतर होने की आशंका है। 

हरियाणा में जल संकट की स्थिति से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान खोजने होंगे। ऐसे में वर्षा जल संचयन सबसे कारगर उपाय है। राज्य सरकार का दावा है कि जल संचयन के मामले में हरियाणा दूसरे राज्यों के मुकाबले में बेहतर काम कर रहा है।  जल प्रबंधन के शानदार प्रदर्शन के लिए हरियाणा को राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट स्टेट इन वाटर मैनेजमेंट का पुरस्कार भी मिल चुका है। तो फिर हरियाणा में पानी की इतनी भारी कमी क्यों है? सरकारी आंकड़ा कहता है कि राज्य में 68,000 से अधिक जल संरक्षण ढांचे बनाए जा चुके हैं और लगभग 2,215 से अधिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा चुका है। 

कुछ दिनों पहले सिंचाई एवं जल संसाधन तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रुति चौधरी ने कहा था कि पहली बार हरियाणा में लगभग 5,700 करोड़ रुपये की लागत से विश्व बैंक समर्थित एकीकृत जल प्रबंधन परियोजना (इंटीग्रेटेड  वाटर प्लान) लागू की जा रही है, जो पूरे प्रदेश के लिए गेम चेंजर साबित होगी। इंटीग्रेटेड वाटर प्लान से यह उम्मीद तो पैदा होती है कि निकट भविष्य में प्रदेश को जल समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा, लेकिन यह भी सही है कि अभी हालात अच्छे नहीं हैं। इसके लिए शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सबको मिलकर वर्षा जल संचयन में हाथ बंटाना होगा। तभी पानी की किल्लत को दूर किया जा सकता है।

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