Sunday, June 21, 2026

विन्या! तेरे दोस्त में अतिथि का रूप देखती हूं


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

गांधीवादी नेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनोबा भावे का वास्तविक नाम विनायक नरहरि भावे था। वह चित्तपावन ब्राह्मण परिवार में पैदा हुए थे। बचपन से ही विनोबा भावे को गणित और रसायन विज्ञान में रुचि थी। उनकी सूझबूझ भी वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाली थी। विनोबा भावे के दो भाई और थे। उन्हें विनोबा नाम महात्मा गांधी ने दिया था। 

बाद में यही नाम प्रचलित हो गया और विनायक नरहरि को लोग कालांतर में भूल गए। उनकी मां रुक्मिणी बाई विदुषी महिला थीं। लेकिन वह भक्तिभाव में हमेशा डूबी रहती थीं। इसका प्रभाव उनके तीनों बेटों पर पड़ा था। बाद में विनोबा भावे ने संन्यास ग्रहण किया और महात्मा गांधी ने उन्हें संत विनोबा कहकर संबोधित किया। विनोबा के बचपन की एक घटना है। 

बताया जाता है कि बचपन में विनोबा का एक साथी उनके साथ ही रहता था। वह उनके साथ ही पढ़ने जाता था। ऐसा कहा जाता है। उन दिनों रात में कुछ खाना बच जाया करता था। उनकी मां बासी भोजन को विनोबा को खाने के लिए दे दिया करती थीं। उनके दोस्त को हमेशा ताजा भोजन दिया करती थीं। यह देखकर एक दिन विनोबा ने अपनी मां से कहा कि मां, तू मेरे साथ भेदभाव करती है। मुझे रोज बासी खाना नाश्ते में देती है और मेरे दोस्त को ताजा व गरम खाना। 

उनकी मां दुखी हो गईं। उन्होंने कहा कि विन्या (मां का दिया नाम) मैं भी इंसान हूं और मुझसे भी गलती हो सकती है। तू मेरा बेटा है और तेरे दोस्त में मैं अतिथि वाला भाव देखती हूं। अतिथि को भला बासी भोजन कैसे दिया जा सकता है। वैसे विनोबा ने यह बात मजाक में कही थी, लेकिन मां को यह बात चुभ गई थी। विनोबा ने जीवन भर अपनी मां की सीख पर अमल किया।

No comments:

Post a Comment