अशोक मिश्र
कहा जाता है कि शल्य चिकित्सा के जनक सुश्रुत थे। सुश्रुत का जन्म छठी शताब्दी ईसा पूर्व कन्नौज में हुआ था। इनके गुरु धन्वंतरि थे। सुश्रुत के जन्म के समय को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कोई इन्हें ईसा पूर्व पहली शताब्दी का मानते हैं। एक बार की बात है। वह कहीं जा रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक हिरन घायल पड़ा हुआ है।उन्होंने उस हिरन के घाव पर औषधियों का लेप लगाया और उसकी देखभाल की। जब हिरन ठीक हो गया, तो उसे जंगल में छोड़ दिया। तभी उनके मन में आया कि जब औषधियों से जानवरों को ठीक किया जा सकता है, तो इंसानों की बीमारियों को क्यों नहीं ठीक किया जा सकता है।
उन्होंने अपने गुरु प्रसिद्ध चिकित्सक धन्वंतरि से इस बारे में बात की, तो धन्वंतरि ने कहा कि बेटा! चिकित्सा केवल एक काम नहीं है, यह दुखी इंसानों को आराम पहुंचाने का महान कार्य है। उसी समय से उन्होंने चिकित्सा विज्ञान में निपुणता हासिल करने के लिए शल्य क्रिया सीखने की कोशिश करनी शुरू कर दी। इसके लिए वह तरबूज, कद्दू और खीरा आदि पर चीरा लगाते और उसे सिलने की कोशिश करते।
कई बार सिलाई अच्छी नहीं होती थी। लेकिन बार-बार प्रयास करने से वह धीरे-धीरे निपुण हो गए। काफी समय बाद एक दिन जब वह आराम कर रहे थे तो उनके दरवाजे पर एक घायल सैनिक आया। उसकी युद्ध में नाक कट गई थी। वह चिंतित था कि अब वह पहले जैसा नहीं दिखेगा। सुश्रत ने उसे धीर बंधाया। उन्होंने चेहरे की त्वचा से नई नाक बनाई और उसकी कटी नाक पर लगा दी। धीरे-धीरे सैनिक स्वस्थ हो गया। यह शायद दुनिया की पहली प्लास्टिक सर्जरी थी। इस घटना के बाद सुश्रुत अमर हो गए?
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