Friday, June 26, 2026

खुले में बचा-खुचा खाना फेंकने वालों पर लगे भारी भरकम जुर्माना

अशोक मिश्र

घर के बाहर अगर किसी महिला का बच्चा खेल रहा है, तो उसे हर समय यही डर बना रहता है कि उसका बच्चा सुरक्षित है या नहीं। हरियाणा के किसी भी जिले में सुबह सड़कों पर टहलना, बच्चों का पार्कों में खेलना, अकेले कहीं आना जाना दुश्वार हो रहा है। हर मां को यही डर सताता रहता है कि घर से बाहर निकले उसके बच्चों को कहीं कुत्ता काट न ले। फरीदाबाद हो या गुरुग्राम, सोनीपत हो या कुरुक्षेत्र, सब जगह एक जैसे हालात हैं। पिछले पांच साल में कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। 

कुत्ते के काटने पर जब घायल व्यक्ति सरकारी अस्पताल पहुंचता है, तो उसे एक लंबी लाइन मिलती है। निजी अस्पतालों में एंटी रैबीज का इंजेक्शन पांच हजार से कम में नहीं मिलता है। ऐसी स्थिति में गरीब आदमी के लिए पांच हजार रुपये खर्च कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। फिर भी किसी तरह गरीब आदमी इंजेक्शन के लिए पैसे का जुगाड़ करता है। पशुपालन विभाग द्वारा 2019 से 2023 तक किए गए एक अध्ययन के अनुसार, राज्य में आवारा कुत्तों की संख्या लगभग 1.8 मिलियन होने का अनुमान है। 

एक अनुमान के मुताबिक, पूरे हरियाणा में प्रतिवर्ष 1.43 लाख से अधिक कुत्ते के काटने के मामले होते हैं, लेकिन इनमें से सरकारी रजिस्टर पर काफी कम ही दर्ज हो पाते हैं। इसलिए वास्तविक आंकड़ों का पता ही नहीं चल पाता है। बहुत सारे लोग कुत्ते के काटने पर झाड़-फूंक में लग जाते हैं या फिर निजी अस्पतालों की शरण लेते हैं।  प्रदेश में नगर निगम की एबीसी यानी एनिमल बर्थ कंट्रोल योजना केवल कागजों पर ही चल रही है। सन 2023 में फरीदाबाद नगर निगम ने दावा किया था कि जिले में 15 हजार कुत्तों की नसबंदी की गई थी। 

अभी हाल में ही दावा किया गया कि इस वर्ष लगभग सात हजार कुत्तों की नसबंदी की गई है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि हर गली में हर महीने कई पिल्ले पैदा हो रहे हैं। कुत्तों का सबसे बड़ा अड्डा कूड़े का ढेर होता है। लोग, होटल या ढाबा चलाने वाले लोग अपने घर और रेस्टोरेंट का बचा हुआ कचरा, सड़ी रोटियां, मांस के टुकड़े आदि कूड़े के ढेर पर फेंक देते हैं। 

नगर निगम नियमित रूप से कूड़ा कचरा नहीं उठाता है जिसकी वजह  से कूड़े के ढेर के आसपास कुत्तों के झुंड जमा हो जाते हैं। उधर से गुजरने वाले लोगों पर कुत्तों का झुंड हमला करता है। बहुत सारे लोग डाग लवर होने का दम भरते हैं। घर से ही बचा खुचा खाना सड़क पर डाल देते हैं। जब इनके द्वारा पाले गए कुत्ते किसी को काट लेते है, तो यही डाग लवर यह कहकर अपनी जान छुड़ा लेते हैं कि इन लोगों ने कुत्ते को उकसाया होगा। उसको पत्थर मारा होगा। ऐसे लोगों से यही अपील की जा सकती है कि यदि कुत्तों से प्यार है तो सड़क पर नहीं, तय जगह खिलाओ। खुले में खाना फेंकने वालों पर भारी भरकम जुर्माना लगना चाहिए। 

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