अघोषित कट की वजह से जहां लोगों को परेशानी हो रही है, वहीं उद्योग-धंधों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। हरियाणा में बिजली की मांग हर साल नई ऊंचाई छू रही है। हरियाणा पावर परचेज सेंटर (एचपीपीसी) के अनुसार 2026-27 की गर्मी में पीक डिमांड 16,454 मेगावाट तक पहुंच सकती है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण का अनुमान भी 16,337 मेगावाट है। पिछले साल 2025 की गर्मी में अधिकतम मांग 15,300 मेगावाट थी। यानी एक साल में 1,150 मेगावाट से ज्यादा का उछाल आया है। राज्य में जैसे जैसे बिजली खपत बढ़ रही है, वैसे-वैसे उपलब्धाता भी काफी तेजी से बढ़ रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य के पास ताप-विद्युत (थर्मल), गैस और नवीकरणीय ऊर्जा को मिलाकर 16,552 मेगावाट से ज्यादा की बिजली उपलब्ध है।
इसका लक्ष्य 9,929 मेगावाट परंपरागत और 6,622 मेगावाट नवीकरणीय यानी हाइड्रो, सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोत हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सन 2030 तक अधिकतम मांग 19,481 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। सरकार के मुताबिक राज्य के पास कुल मिलाकर पर्याप्त बिजली उपलब्ध है, लेकिन मई-जून जैसी भीषण गर्मियों में कुछ उच्च खपत वाले दिनों में पीक डिमांड और ऊर्जा की कमी भी देखी गई। सरकार उपलब्धता बढ़ाने की पूरी कोशिश कर रही है। इसके लिए प्रदेश सरकार ने फतेहाबाद में परमाणु ऊर्जा परियोजना और भी कई थर्मल विस्तार परियोजना पर काम शुरू कर दिया है।
इसके बावजूद शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बार-बार लगने वाले अघोषित बिजली कट सारी हकीकत बयान कर देते हैं। पंद्रह जून की मियाद खत्म होने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों ने धान की फसल बोनी शुरू कर दी है। फसल की सिंचाई के लिए पानी चाहिए। इसके लिए ट्यूबवेल चलाना पड़ेगा। बिजली न आने से सिंचाई प्रभावित हो रही है। हालांकि यह भी सही है कि प्रचंड गर्मी के चलते ट्रांसफार्मर आदि जल्दी गर्म हो जाते हैं और उनमें आग लगने की घटनाएं भी देखने को मिलती हैं। इसके बावजूद लगने वाले बिजली कट से उद्योगों को भी भारी नुकसान हो रहा है। मशीनें बंद रहने से जहां उत्पादन प्रभावित होता है, वहीं कामगार भी खाली बैठे रहते हैं।
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