Sunday, August 2, 2026

जीभ ही अच्छा-बुरा कहलवाती है

 बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

अरबी, फारसी और तुर्की साहित्य में लुकमान के संबंध में काफी कहानियां मिलती हैं। कहते हैं कि इनका जिक्र कुरान में भी किया गया है। साहित्य में इन्हें काफी बुद्धिमान बताया गया है। पुरानी पुस्तकों में इनका नाम लुकमान अल हाकिम के नाम से जाना जाता है। कुछ पुस्तकों में इन्हें बहुत बड़ा हकीम माना गया है। लुकमान के बारे में मशहूर है कि यह बचपन में गुलाम थे। 

जिस युग में हकीम पैदा हुए थे, उस युग में अरब देशों में गुलाम रखने का चलन था। जिस व्यक्ति के लुकमान गुलाम थे, वह बड़ा भला आदमी था। वह अपने गुलामों के प्रति दयाभाव रखता था और उन्हें बेवजह यातना नहीं दिया करता था। उनके सुख-दुख का ख्याल भी रखता था। उन्हीं दिनों लुकमान की बुद्धिमानी की चर्चा होने लगी थी। एक दिन इनके मालिक ने लुकमान को बुलाया और कहा कि आज मैं तुम्हारी बुद्धि की परीक्षा लेना चाहता हूं। यदि तुमने मेरे सवालों का सही-सही जवाब दिया, तो तुम्हें गुलामी से मुक्त कर दूंगा। 

लुकमान मान गए। मालिक ने कहा कि यह बकरा ले जाओ और इसका जो भी अच्छा अंग हो वह लेकर आओ। हकीम थोड़ी दे बाद लौटे और अपने मालिक के सामने बकरे की जीभ रख दी। मालिक ने कहा कि क्या यही सबसे अच्छा अंग है? लुकमान ने कहा कि शरीर में जीभ अच्छी हो तो सब कुछ अच्छा होता है। मालिक ने कहा कि इसे हटाओ और सबसे बुरा अंग लेकर आओ। 

कुछ क्षण बाद लुकमान फिर जीभ लेकर लौटे और बोले-शरीर में जीभ बुरी हो, तो जीवन खराब कर देती है। लुकमान के जवाब से मालिक बहुत खुश हुआ। उसने समझ लिया कि लुकमान उसे क्या समझाना चाहते हैं। उसने तत्काल लुकमान को गुलामी से मुक्त कर दिया।

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