अशोक मिश्रहरियाणा में पिछले दो दशकों से जल संकट धीरे-धीरे गहराता जा रहा है। इसका कारण बड़े पैमाने पर भूगर्भ जल दोहन है। यह जल दोहन 135 प्रतिशत से अधिक हो जाने की वजह से 143 ब्लॉक में से 91 ओवर-एक्सप्लॉइटेड की श्रेणी में हैं। राज्य के 17 जिलों में भूजल में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की अधिकता पाई गई है जिसका लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। शहरों और गांवों में जहां पानी का उपयोग जनसंख्या बढ़ने से बढ़ा है, वहीं कृषि में पानी के अधिक उपयोग और सतही जल की कमी से सिरसा, भिवानी, हिसार और सोनीपत जैसे जिलों में पेयजल संकट बढ़ गया है।
पिछले दो दशकों में हरियाणा के 22 में से 16 जिलों में भूजल स्तर काफी नीचे गिर गया है। अम्बाला, कैथल और करनाल में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई है। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट (अप्रैल 2025-जनवरी 2026) बताती है कि प्रदेश में लिए गए 25,240 नमूनों में से 396 खराब पाए गए, जिनमें 17 जिलों में फ्लोराइड और नौ में यूरेनियम की मात्रा अधिक पाया गया है। इन्हीं सब स्थितियों से निपटने के लिए केंद्रीय बजट में इस वर्ष वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने हरियाणा को मूल बजट के अलावा उत्कृष्ट प्रदर्शन के कारण अतिरिक्त 144.85 करोड़ रुपये दिए है। इससे कुल प्रोत्साहन फंड 615.37 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
वैसे भी पिछले साल मिले बजट की बदौलत राज्य के पांच ब्लॉक और 90 से अधिक ग्राम पंचायतों ने भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार दिखाया है। पिछले साल भी फंड बढ़ने से जल संरक्षण के कामों में तेजी आई है, जिसमें 1,647 वर्षा जल संचयन प्रणालियाँ के जरिये सरकारी भवनों और स्कूलों में वर्षा जल संचयन स्थापित किए गए। हरियाणा तालाब और अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से तालाबों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। यमुनानगर जैसे जिलों में चेक बांधों को मजबूत और मरम्मत किया जा रहा है।
लेजर लैंड लेवलिंग तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। 'म्हारा पाणी म्हारी विरासत' योजना के तहत, पंचायतों को जल सुरक्षा योजनाएं बनाने के लिए सशक्त किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है। इस बार केंद्र सरकार से अटल भूजल योजना के लिए मिले 144 करोड़ रुपये का उपयोग प्रदेश के डार्क जोन में आए जल संकट को दूर करने में किया जा सकता है।
गांवों में जल बचाने, उसे सहेजन और भूजल का स्तर सुधारने के लिए तालाबों को पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसके लिए पूरे प्रदेश में अभियान चलाने की सरकार योजना बना रही है। गांवों में भूजल सुधरने से शहरी इलाकों में पड़ रहा दबाव भी कम होगा। इससे शहरों में लगे उद्योगों को भी आवश्यक पानी मिलेगा।

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