बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
संकट के समय यदि धैर्य रखा जाए, तो बड़ी से बड़ी समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। जो लोग संकट के समय अपना धैर्य खो देते हैं, वह परेशानी से निजात नहीं पा सकते हैं। धैर्य रखने वाला व्यक्ति हमेशा अपने काम में सफल होता है। बहुत पुराने समय की बात है। किसी गांव में एक किसान रहता था। उसने कई जानवरों के साथ-साथ एक गधा पाल रखा था।गधा काफी उम्र का हो गया था। अब किसान ने उससे काम लेना भी लगभग बंद कर दिया था। एक दिन जब गधा चरने गया, तो वह एक सूखे कुएं में गिर गया। गधा कुएं से निकलने का प्रयास करने लगा, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। उधर जब नियत समय पर गधा घर नहीं लौटा, तो किसान उसे खोजने निकला। खोजते-खोजते वह उस कुएं के पास पहुंचा, तो उसे कुएं में से गधे के चिल्लाने की आवाज सुनाई दी।
कुएं को देखते ही किसान समझ गया कि इसमें से गधे को निकालने का प्रयास करना व्यर्थ है क्योंकि इतने गहरे कुएं से गधे का निकल पाना असंभव है। किसान ने यह भी सोचा कि गधा तो काफी बूढ़ा हो गया है। अब वह मेरे किसी काम का भी नहीं रह गया। इसलिए इसको निकालने की कोशिश करना बेकार है। यही सोचकर उसने गांववालों को बुलाया और कुएं को पाट देने की बात कही।
लोगों ने कुएं में मिट्टी डालनी शुरू की। उधर कुएं में जैसी ही मिट्टी आती, गधा मिट्टी अपने शरीर से झाड़ देता। धीरे-धीरे गधा ऊपर आता चला गया। जब कुआं पूरी तरह पाट दिया गया, तो गधा उसमें से निकलकर जंगल की ओर चला गया। वह जान गया था कि किसान ने कुएं में मिट्टी उसे बचाने के लिए नहीं, बल्कि जिंदा दफन कर देने के लिए कुएं में मिट्टी डलवाई थी। गधे के जंगल चले जाने के बाद किसान को भी अपनी हरकत को लेकर पश्चाताप हुआ, लेकिन अब हो भी क्या सकता था।
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