अशोक मिश्रहरियाणा सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 150 नए राजकीय विद्यालयों के भवन को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने का फैसला लिया है। यही नहीं, सीएम सैनी ने 719 उत्कृष्ट विद्यालयों में भी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया है। वैसे भी सीएम ने पहले ही सरकारी स्कूलों में मुखिया को एक लाख रुपये तक स्कूल की व्यवस्था सुधारने के लिए बिना विभागीय अनुमति के खर्च करने की छूट दे रखी है। इतने रकम से स्कूलों में बच्चों के लिए पेयजल की व्यवस्था, लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की जा सकती है।
यदि स्कूल में पहले से ही ये सुविधाएं हैं, तो इससे दूसरे भी सुधारात्मक कार्य किए जा सकते हैं। स्कूलों में सुविधाएं बढ़ने और अध्यापकों की भर्ती से परीक्षा परिणाम में भी काफी सुधार आया है। याद करें कि 2023 में दसवीं का पास प्रतिशत केवल 57.73 प्रतिशत था, जो सरकार और अध्यापकों के संयुक्त प्रयास की वजह से 2024 में 94 प्रतिशत से ऊपर चला गया। 2025 में भी नियमित छात्रों का परिणाम 92.49 प्रतिशत रहा जो काफी संतोषजनक है। एएसईआर यानी एनुअल स्टेटस आफ एजुकेशन रिपोर्ट 2024 की रिपोर्ट में हरियाणा के सरकारी स्कूलों ने राष्ट्रीय औसत को भी पीछे छोड़ दिया था।
रिपोर्ट बताती है कि सरकारी स्कूलों में कक्षा तीन, पांच और आठ में भाषा और गणित की दक्षता का स्तर देश के सरकारी और निजी स्कूलों के मिले-जुले औसत से अधिक है। इसी सुधार की झलक सुपर-100 जैसी योजनाओं में भी दिखाई देती है, जहां सरकारी स्कूलों के 21 बच्चों ने बड़े कीर्तिमान बनाए हैं। यह हरियाणा के लिए एक गौरव की बात है। हालांकि सैनी सरकार को शिक्षकों की भर्ती के संबंध में ध्यान देने की जरूरत है। यदि सभी विद्यालयों के लिए आवश्यकता के अनुरूप शिक्षकों की भर्ती की जाती है, तो इससे न केवल स्कूलों में होने वाली पढ़ाई की गुणवत्ता सुधरेगी, वरन प्रदेश में बेरोजगारी भी कम होगी।
विधानसभा में 27 फरवरी 2026 को कांग्रेस विधायक आदित्य सुरजेवाला के सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा था कि जनवरी 2026 तक 15,451 पद खाली हैं जिनमें 3,998 पीजीटी, 7,707 टीजीटी और 3,746 पीआरटी शामिल हैं। एक अन्य आंकड़े के अनुसार 298 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी नियमित शिक्षक नहीं है और 1,051 स्कूल केवल एक स्थायी शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। कुल मिलाकर हरियाणा के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से बेहतर बनाने की है। सरकारी स्कूलों में इमारतें और बोर्ड रिजल्ट सुधर रहे हैं। जब तक हर कक्षा में शिक्षक और हर स्कूल में पानी, बिजली और इंटरनेट जैसी बुनियाद पूरी तरह पक्की नहीं होगी, तब तक सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहेगी।
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