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Saturday, November 29, 2025

टूटे फूटे खेल उपकरण, खेल परिसरों में अव्यवस्था, कैसे जीतें मेडल?

 अशोक मिश्र

रोहतक और झज्जर में दो खिलाड़ियों की मौत के बाद प्रशासन की नींद खुली है। राज्य भर में स्टेडियम की जांच की जाने लगी है। टूटे-फूटे उपकरणों को बदलने के आदेश जारी किए जा रहे हैं। सरकार ने दो खिलाड़ियों की मौत के बाद जांच कमेटी गठित कर दी है। जांच कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जिस तरह इन दिनों प्रशासन जागरूकता दिखा रहा है, यदि उसने पहले दिखाई होती, तो देश और प्रदेश अपने दो प्रतिभावान खिलाड़ियों से वंचित नहीं होता। 

इन दोनों खिलाड़ियों से प्रदेश और देश को काफी उम्मीदें थीं। यह भी संभव है कि खेल अधिकारियों की लापरवाही का शिकार बने दोनों खिलाड़ी अपने खेल जीवन में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करते। यदि ऐसा नहीं भी होता तो भी दो परिवारों के चिराग खेल परिसरों की देखरेख करने वाले अधिकारियों की लापरवाही के चलते असमय मौत का शिकार हो गए। यह किसी परिवार की व्यक्तिगत क्षति होने के साथ-साथ प्रदेश की भी क्षति है। दोनों हादसों के बाद स्थानीय प्रशासन की नींद टूटी है। 

सेकेंडरी शिक्षा निदेशक ने राज्य के सभी जिला शिक्षा अधिकारी और जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया गया है कि खेल परिसरों में जितने भी जर्जर खेल उपकरण हैं, उन्हें तुरंत वहां से हटाया जाए। उन्हें बदला जाए और अगर कोई उपकरण तत्काल नहीं बदला जा सकता है, तो उस परिसर को ही तत्काल बंद कर दिया जाए। स्कूल-कालेजों के खेल उपकरणों की तत्काल समीक्षा की जाए। 

यदि किसी जिले में किसी तरह की लापरवाही पाई गई, तो जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी और स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सच तो यह है कि देश-विदेश से मेडल जीतकर लाने वाले खिलाड़ियों को वैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जिसके वे हकदार हैं। वैसे तो खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए सरकार ने हर जिल में खेल परिसरों की स्थापना कर रखी है, लेकिन देख-रेख का पूरी तरह अभाव है। सरकार के प्रयासों को पलीता लगाने में अधीनस्थ खेल अधिकारी और कर्मचारी कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। 

खेल परिसरों में बास्केटबाल ग्राउंड और अन्य खेल से जुड़े स्थलों की स्थिति काफी दयनीय है। कहीं बास्केट बाल के ग्राउंड में लगे पोल जंग खा रहे हैं, तो कहीं जिमनैस्टिक उपकरण इधर उधर बिखरे पड़े हैं। कई जिलों में तो स्टेटिंग रिंक में जगह-जगह दरारें हैं, लेकिन इन्हें ठीक करने की जहमत न स्थानीय प्रशासन ने उठाई और न ही इन खेल परिसरों की देखरेख करने वालों ने। ऐसी स्थिति में खिलाड़ी कैसे प्रैक्टिस कर सकता है। सरकार इन खेल परिसरों के लिए काफी फंड जारी करती है, लेकिन फंड का सही समय पर उपयोग भी नहीं किया जाता है।