अशोक मिश्रसाइबर क्राइम नेटवर्क कम होने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। इसका संबंध बेरोजगारी से भी जोड़ा जा रहा है। जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, बेरोजगार युवा अपराध की ओर आकर्षित होते जा रहे हैं। अब तो हालात यह है कि कुछ साइबर ठग बेरोजगार युवाओं को नौकरी का झांसा देकर दूसरे देशों में ले जाकर साइबर अपराध करवा रहे हैं। फरीदाबाद के एक युवक आकाश महादेव को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार किया है जिस पर हरियाणा के पंद्रह युवकों को डंकी रूट से म्यांमार ले जाकर साइबर क्राइम करने वाले नेटवर्क को सौंप दिया था।
इन युवकों को वहां मजबूर होकर यह अपराध करना पड़ता था। साइबर नेटवर्क खड़ा करने वाला आकाश महादेव दरअसल म्यांमार में दोबारा साइबर नेटवर्क खड़ा करना चाहता था। इससे पहले भी वह साइबर ठगी का नेटवर्क वह म्यांमार में खड़ा कर चुका था, लेकिन म्यांमार में पिछले कई साल से सैन्य शासन के खिलाफ चल रहे युद्ध के दौरान सेना ने इस आपराधिक नेटवर्क को छिन्न-भिन्न कर दिया था।
महादेव पुराने आपराधिक नेटवर्क को फिर से खड़ा करना चाहता था। लेकिन म्यांमार पहुंचने से पहले ही मुंबई में उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फरीदाबाद पुलिस ने पहले से ही उसके खिलाफ लुकआऊट सर्कुलर जारी किया था क्योंकि महादेव ने फरीदाबाद के एक युवक को नौकरी दिलाने के नाम पर म्यांमार बुलाकर साइबर ठगी के जाल में फंसा दिया था। पीड़ित युवक ने इसकी शिकायत पुलिस से की थी। दरअसल, साइबर ठगी के आरोपी आकाश महादेव महाराष्ट्र के शोलापुर का रहने वाला है।
वह खुद भी साइबर ठगों के चंगुल में फंस चुका था। बाद में उसने साइबर ठगों से हाथ मिला लिया था। साइबर ठगों से उसने भारत से युवकों को सप्लाई का जिम्मा लिया था। देश में जैसे-जैसे बेरोजगारी बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे बेरोजगार युवा निराश होकर अपराध की ओर उन्मुख हो रहे हैं। प्रदेश में लूटपाट, चोरी, छीनाछपटी जैसे अपराध भी बढ़ रहे हैं, लेकिन साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे अपराध करते समय अपराधी का चेहरा सामने नहीं होता है, इसलिए अपराध करने वाला सोचता है कि वह पकड़ा नहीं जाएगा। यही वजह है कि साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराध में सभी अपराधी अपना भाग्य आजमाने की कोशिश करते हैं।
साइबर ठग आधुनिक तकनीक का फायदा उठाकर अपने शिकार पर कुछ दिन तक निगाह रखते हैं। साइबर ठग एक ही समय में कई टारगेट पर निगाह रखते हैं। अपने शिकार का विश्वास जीतने के बाद वह पूंजी निवेश के नाम पर ठगते हैं, लिंक भेजकर बैंक एकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। एटीएम कार्ड की क्लोनिंग करते हैं। इसी तरह के न जाने कितने अपराध साइबर अपराधी करते हैं।
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