Thursday, July 16, 2026

हरित क्रांति की नई गाथा लिखने को तैयार हरियाणा

अशोक मिश्र

इन दिनों पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन के संकट से जूझ रही है। पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है। ऐसे संकट के दौर में 17 जुलाई को हरियाणा में एक हरित विकास की एक नई क्रांति होने जा रही है। एक दिन बाद भारत हाईड्रोजन ट्रेन चलाने वाला आठवां देश हो जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नब्बे किमी की यात्रा करने वाली हाईड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे और हरियाणा को पहली हाईड्रोजन ट्रेन चलाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। निस्संदेह यह हरियाणा के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। 

अगर योजना, सुरक्षा और लागत का संतुलन बना रहा तो जींद-सोनीपत की यह 90 किमी की पटरी, पूरे हरियाणा के लिए 90 साल आगे की सोच बन सकती है। इसके लिए निस्संदेह केंद्र और राज्य सरकार बधाई के पात्र हंै। हाईड्रोजन ट्रेन की सबसे बड़ी ताकत यह है कि यह डीजल और बिजली दोनों पर निर्भर नहीं है। इसमें लगे फ्यूल सेल हाईड्रोजन गैस से बिजली बनाते हैं। उसी से ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुआं नहीं निकलता, सिर्फ पानी की भाप बनती है। इसका नतीजा यह निकलेगा कि नब्बे किमी की पटरी के आसपास इस ट्रेन की वजह से प्रदूषण नहीं होगा। कार्बन का उत्सर्जन ही नहीं होगा। 

अगर यह कहा जाए कि 17 जुलाई से चलने वाली हाईड्रोजन ट्रेन केवल एक रेलगाड़ी नहीं है, बल्कि हरियाणा के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक बहुत बड़ा कदम है, तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। दिल्ली एनसीआर से सटे जिलों में डीजल इंजन और सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों की वजह से होने वाले प्रदूषण को कम करने में यह ट्रेन सहायक हो सकती है, यदि हाईड्रोजन गैस के माध्यम से चलने वाले वाहनों के इंजन ईजाद कर लिए जाएं तो निकट भविष्य में हरियाणा ही नहीं, देश के सभी राज्य शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे। इससे पूरे देश के पर्यावरण में भारी सुधार होगा और लोगों को सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु उपलब्ध हो सकेगी। 

हाईड्रोजन ट्रेन की वजह से तेज और साफ सफर संभव हो सकेगा। इससे हरियाणा में उद्योग, शिक्षा और रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। लोग कम समय में आ-जा सकेंगे और माल ढुलाई भी बेहतर होगी। अभी तो यह हरियाणा में केवल एक हाईड्रोजन ट्रेन की शुरुआत हो रही है। निकट भविष्य में हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों में भी हाईड्रोजन ट्रेन का संचालन संभव होगा और पूरे देश की तस्वीर बदल जाएगी। हाईड्रोजन ट्रेन और वाहनों का संचालन शुरू होने पर देश की डीजल और पेट्रोल के आयात पर निर्भरता घटेगी और ईंधन घरेलू स्तर पर ही बनेगा। यदि ऐसा होता है तो देश में हाईड्रोजन प्लांट, रीफ्यूलिंग स्टेशन और रखरखाव से जुड़े नए उद्योग और नौकरियां पैदा होंगी। बहरहाल, 17 जुलाई को हरियाणा से देश में हरित क्रांति की मशाल जलने वाली है जो भविष्य में पूरे देश की तस्वीर बदल सकती है।

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