हरियाणा में कब रुकेंगी प्रेम संबंधों के नाम पर होती निर्मम हत्याएं?
अशोक मिश्र
फरीदाबाद के सिकरोना गांव स्थित सरस्वती सीनियर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका की 27 बार चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। हत्या का कारण यह बताया जा रहा है कि हत्या का आरोपी उससे प्रेम करता था और शिक्षिका पर विवाह करने के लिए दबाव डाल रहा था। शिक्षिका पहले से ही शादीशुदा थी। उसने फिरोजपुर कलां निवासी विकास से बारह साल पहले प्रेमविवाह किया था। टीचर के दो बच्चे भी थे। हत्या के आरोपी अमित से उसकी पहचान तब हुई थी, जब वह दो साल पहले फिरोजपुर कलां में अमित के घर के पास के एक स्कूल में पढ़ाती थी। तभी दोनों की आपस में पहचान हुई थी। आरोपी टीचर पर विवाह करने के लिए दबाव डाल रहा था, जबकि टीचर संध्या ने मना कर दिया था और वहां से नौकरी छोड़कर वह सिकरोना गांव में पढ़ाने लगी थी।एकतरफा प्यार, अवैध संबंध या प्रेम विवाह जैसे मामलों में हत्या की घटनाएं इधर काफी देखने को मिल रही हैं। हरियाणा में एकतरफा प्रेम में होने वाली हत्याएं अब कोई अपवाद नहीं रहीं, यह एक पैटर्न बन चुकी हैं। ऐसे मामलों में प्रेम भावना नहीं, कब्जे की मानसिकता बन जाता है। हरियाणा जैसे प्रदेश में जहां पितृसत्ता, इज्जत और मर्दानगी की परिभाषा बहुत कठोर है। यहां प्रेम को भी अक्सर उसी चश्मे से देखा जाता है। लड़के को बचपन से सिखाया जाता है कि उसे जीतना है, पाना है और लड़की को सिखाया जाता है कि उसका इनकार अंतिम नहीं है।
जब यही लड़का बड़ा होकर एकतरफा प्रेम करता है, तो वह प्रेम में संवाद नहीं, अधिकार खोजता है। अगर लड़की हां नहीं कहती, तो उसे लगता है कि उसकी मर्दानगी को चुनौती दी गई है। इस चुनौती का जवाब वह हिंसा से देता है। यह प्रेम की विफलता नहीं, हक जताने की असफलता का प्रतिशोध है। फरीदाबाद की शिक्षिका की सोमवार को की गई हत्या इसी भावना को दर्शाती है। ऐसे मामलों में प्रेम नहीं, बल्कि झूठ, धोखा और पितृसत्तात्मक दोहरे मापदंड हत्या की वजह बनते हैं। पुरुष के अवैध संबंध को अक्सर चुपचाप सहन करने या दबाने की कोशिश होती है, पर महिला के संबंध को सीधे उसके चरित्र और पूरे परिवार की इज्जत से जोड़कर उसकी जान तक ले ली जाती है। यह रवैया लगभग देश के सभी राज्यों में पाया जाता है।
यह सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं है, बल्कि सामाजिक सोच का है। पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है, जैसा टीचर हत्याकांड में हुआ। कोर्ट आने वाले दिनों में उसे वाजिब सजा भी दे देगी। इसके बाद भी ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। जब तक समाज में प्रेम का अर्थ पाना नहीं, देना नहीं सिखाया जाएगा, जब तक ऐसी घटनाओं पर रोक लगा पाना संभव नहीं होगा। जब तक लड़कों को यह नहीं सिखाया जाएगा कि किसी का इनकार भी पूरा वाक्य है, तब तक ऐसे खून बहता रहेगा।
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