अशोक मिश्रपलवल जिले के गदपुरी थाना क्षेत्र में असावटी गांव की एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या का कारण छात्रा के स्कूल आते-जाते समय कुछ युवकों द्वारा की जा रही छेड़छाड़ को बताया जा रहा है। युवकों की छेड़छाड़ और भाई की पिटाई से आहत छात्रा ने 17 मार्च को पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। पिछले छह महीने से छात्रा को युवक परेशान कर रहे थे।
इसके चलते आखिरकार नाबालिग छात्रा ने पढ़ाई छोड़ने का फैसला लिया। इसके बावजूद छात्रा का पिंड नहीं छूटा। युवक इतने मनबढ़ थे कि वह अब घर आकर उसे परेशान करने लगे थे। 16 मार्च को जब लड़के घर आकर छात्रा को परेशान करने लगे, तो उसके भाई ने इसका विरोध किया। इस पर युवकों ने छात्रा के भाई की बुरी तरह पिटाई कर दी। इस पिटाई से आहत छात्रा ने पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। कुछ युवकों की छेड़छाड़ ने एक नाबालिग को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया।
पुलिस यदि इन युवकों को सजा भी दिलाती है, तो क्या सजा मिलेगी। एकाध साल बाद यह लड़के छूट जाएंगे? लेकिन एक जीवन खिलने से पहले ही मुरझा गया, उसको न्याय कैसे मिलेगा? हरियाणा में न जाने कितनी लड़कियां ऐसी या इससे दूसरी परिस्थितियों के चलते स्कूल छोड़ने या आत्महत्या करने पर मजबूर हैं। हरियाणा में पिछले कुछ वर्षों से स्कूलों से ड्रापआउट का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस मामले को बजट सत्र के दौरान संसद में भी उठाया गया था।
कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने ड्रापआउट मामले को उठाते हुए सरकार से इस मामले में कदम उठाने की अपील की थी। सरकार ने भी आश्वासन दिया था कि वह जल्दी ही स्कूल छोड़ने वाले छात्र-छात्राओं को वापस स्कूल लाने का हरसंभव प्रयास करेगी। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले एक साल में हरियाणा की 5.30 लाख बच्चे विभिन्न कारणों से स्कूल छोड़कर घर बैठ गए है। इनमें से करीब 2.58 लाख छात्र सरकारी स्कूलों से और लगभग 2.91 लाख छात्र निजी स्कूलों से पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनमें असावटी वाली छात्रा जैसी परिस्थितियों में पढ़ाई छोड़ने वाली छात्राओं की संख्या ज्यादा ही थी।
स्कूलों से बच्चों के ड्रॉप आउट होने का सबसे बड़ा कारण लोगों की कम आय है। लेकिन यह भी सच है कि स्कूल-कालेज दूर होने की वजह से लोग अपनी लड़कियों को पढ़ने भेजने से कतराते हैं। ऐसी स्थिति में ज्यादातर मां-बाप अपनी बेटियों को अकेले भेजने से घबराते हैं।
उनको लगता है कि यह उनकी बेटी के साथ ऊंच नीच हो गया तो क्या होगा? यदि ग्रामीण क्षेत्र में थोड़े पास पास स्कूल और कॉलेज हो तो ड्रॉप आउट काफी हद तक रुक सकता है। इसके साथ ही छात्राओं को सुरक्षित और स्वस्थ माहौल देना भी जरूरी है। यदि छात्रा को कोई मनचला प्रताड़ित करेगा, तो वह पढ़ने कैसे आ पाएंगी?

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