अशोक मिश्रहरियाणा में जहां युवा खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और प्रांतीय खेलों में पदक जीत रहे हैं, वहीं राज्य के कुछ युवा नशा करके अपना भविष्य बरबाद कर रहे हैं। हरियाणा के लिए नशा कारोबार एक बड़ी समस्या है। हरियाणा नारकोटिक्स डिपार्टमेंट और स्थानीय पुलिस नशीले पदार्थों की सप्लाई करने वालों पर जहां कड़ाई से कार्रवाई कर रही है, वहीं नारकोटिक्स डिपार्टमेंट के अधिकारी और कर्मचारी स्कूल, कालेज और विश्वविद्यालयों में जाकर नशे के खिलाफ छात्र-छात्राओं को जागरूक भी कर रहे हैं।
इसके बावजूद नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। पिछले साल आतंकवादी गतिविधियों के लिए चर्चा में रही अलफलाह यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है। पिछले साल आतंकवादी घटनाओं में लिप्त और दिल्ली कार विस्फोट के मामले में अलफलाह यूनिवर्सिटी के कई डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। अब इसी यूनिवर्सिटी का एक छात्र दो सौ ग्राम से अधिक गांजा की तस्करी करता हुआ पकड़ा गया है। एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के छात्र अदीदशाह दिल्ली के सप्लायर से गांजा लेकर यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थियों को सप्लाई करता था।
कुछ बाहरी लोग भी अदीदशाह से गांजा लेने आते थे। हरियाणा में नशे का अवैध कारोबार (ड्रग तस्करी) एक गंभीर समस्या है। पंजाब और राजस्थान की सीमा से सटे इलाकों और बड़े शहरों में इसका ज्यादा असर है। सरकार और पुलिस इसके खिलाफ 'जीरो टॉलेरेंस' (सख्त रुख) की नीति अपना रहे हैं। इसे रोकने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। नशे का कारोबार अब केवल शहरों तक सीमित नहीं रहा, यह गांव-देहात तक अपनी जड़ें जमा चुका है।
सबसे खतरनाक बात यह है कि नशे का शिकार सबसे ज्यादा 15 से 30 साल के युवा हो रहे हैं। बेरोजगारी, तनाव, दिखावे की जिंदगी और गलत संगत ने उन्हें इस दलदल में धकेल दिया है। युवाओं को नशे के दलदल से निकालने के लिए सरकार को तस्करी की सप्लाई चेन तोड़नी होगी। हरियाणा की सीमा पर बसे जिलों में निगरानी बढ़ानी होगी। यदि राज्य में कहीं भी कोई अवैध नशीला पदार्थ बेचता पाया जाए, तो उसकी संपत्ति की कुर्की की जाए। सरकार को तस्करों पर गैंगस्टर एक्ट लगाकर उन्हें जेल में ठूंस देना चाहिए। साथ ही नशीली दवाओं की अवैध बिक्री करने वाले मेडिकल स्टोर पर लगाम लगानी होगी, ताकि युवाओं का भविष्य सुधारा जा सके। इसके लिए जरूरी है कि सरकार, समाज, स्कूल और परिवार चारों मिलकर नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ें तभी नशा रोकने में सफलता मिल सकती है। किसी भी राज्य की अकेली सरकार नशे के कारोबार को नहीं रोक सकती है। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है।
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