बोधिवृक्ष
अशोक मिश्र
ड्वाइड डेविड हाइजनहावर ने द्वितीय विश्व महायुद्ध के दौरान अमेरिकी और ब्रिटिश सेना का नेतृत्व किया था। हाइजनहावर का जन्म 1890 को टेक्सास शहर में हुआ था। वह अपने माता-पिता के सात पुत्रों में से तीसरे थे। बचपन में एक हादसा हुआ था जिससे उनके छोटे भाई की एक आंख चली गई थी जिसका पछतावा उन्हें जीवन भर रहा।पहले विश्व महायुद्ध में उन्हें बहुत ज्यादा अपने रणकौशल को दिखाने का मौका नहीं मिला, लेकिन जब दूसरा विश्व महायुद्ध छिड़ा, तो उन्हें मित्र राष्ट्रों की सेना का सर्वोच्च अधिकारी नियुक्त किया गया। युद्ध के दिनों में वह अपने घर से रोज एक निश्चित समय पर सफेद गाड़ी में पेरिस के मुख्य रास्ते से सेना के कैंप आया जाया करते थे। इस बात की खबर किसी तरह जर्मन सैनिकों को मिल गई।
एक दिन अपने नियत समय पर सफेद गाड़ी निकली। रास्ते में फ्रांसीसी सैनिकों के वेश में जर्मन सैनिक खड़े हो गए। उन्होंने उस गाड़ी को बम से उड़ा दिया। जब यह देखा, तो फ्रांसीसी सैनिकों में हड़कंप मच गया। यह खबर फैल गई कि जनरल आइजनहावर मारे गए। थोड़ी देर बाद लोगों ने देखा कि आइजनहावर पैदल चले आ रहे हैं। लोगों को बड़ा आश्चर्य हुआ।
सैनिक अफसरों ने उनसे पूछा कि आप बम धमाके से बच कैसे गए तो उन्होंने बताया कि जब मैं आ रहा था, तो मैंने रास्ते में देखा कि एक बुजुर्ग दंपति एक अस्पताल का पता पूछ रहे हैं। उनके बेटे का उस अस्पताल में आपरेशन हुआ था। मैंने ड्राइवर से कहा कि तुम गाड़ी लेकर जाओ, मैं इन्हें अस्पताल तक छोड़कर आता हूं। मैं उस बुजुर्ग दंपति को अस्पताल तक छोड़ने के बाद आ रहा हूं। मैं जानता हूं कि नेक काम का फल नेक ही मिलता है।