Tuesday, September 8, 2026

गरीबी और आवास की भारी कमी के चलते जर्जर इमारतों में रहने की मजबूरी

अशोक मिश्र

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को दोपहर में करीब पचास साल पुरानी एक पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। इसमें छात्रों के पेइंग गेस्ट आवास चल रहे थे। इस हादसे में सात लोगों की जान चली गई और कई घायल हुए। मरम्मत कार्य और पानी जमा होने जैसी वजहें सामने आईं, लेकिन असल में यह घटना अवैध विस्तार, कमजोर संरचना और प्रशासनिक लापरवाही का जीता जागता नमूना थी। पिछले दो-तीन सालों में दिल्ली में ऐसी घटनाएं बार-बार हुई हैं। 

सोलह सालों में इक्कीस प्रमुख इमारत हादसों में एक सौ छत्तीस लोगों की मौत हो चुकी है। हरियाणा की तस्वीर भी इससे अलग नहीं है। मानसून के दिनों में हरियाणा की तस्वीर और भी भयावह हो जाती है। पिछले साल 8 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री सैनी ने बताया था कि भारी बारिश के कारण अलग-अलग जगहों पर मकान गिरने से 12 लोगों की मौत हुई है। इनमें फतेहाबाद और भिवानी में तीन-तीन, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर में दो-दो, हिसार और फरीदाबाद में एक-एक मौत शामिल है। 

उसी साल भारी बारिश से छत गिरने की अलग-अलग घटनाओं में सात लोगों, जिनमें तीन बच्चे थे, की मौत की पुष्टि हुई थी। गुरुग्राम, मानेसर, बादशाहपुर, पटौदी जैसे निर्माण हब में हर साल मजदूरों की मौत का सिलसिला अलग चलता रहता है। हरियाणा में तेजी से हो रहा शहरीकरण, अवैध निर्माण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इन घटनाओं को बढ़ावा देते हैं। नगर निगम अधिनियम और हरियाणा बिल्डिंग कोड दो हजार सत्रह में खतरनाक इमारतों के लिए प्रावधान हैं। 

आयुक्त या सक्षम अधिकारी जर्जर इमारत को मरम्मत या गिराने का आदेश दे सकते हैं। ऊंची जोखिम वाली इमारतों के लिए संरचनात्मक सुरक्षा उपाय, थर्ड पार्टी निरीक्षण और पोस्ट-कंस्ट्रक्शन आॅडिट अनिवार्य किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों को लागू नहीं किया जाता है। कई बार खतरनाक घोषित इमारतों की सूची बनती है, फिर भी समय पर कार्रवाई नहीं होती। पुरानी या कमजोर इमारतों में रहने की मजबूरी आर्थिक दबाव से जुड़ी है। गरीबी, आवास की भारी कमी और वैकल्पिक विकल्प न होना उन्हें जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर करता है। 

कई बार मालिक भी किराये की कमाई के लिए पुरानी इमारतों में अतिरिक्त मंजिलें चढ़ा देते हैं या मरम्मत टालते हैं। ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है। यदि हर नगर निकाय हर साल मानसून से पहले ड्रोन और जूनियर इंजीनियरों से हर वार्ड की 30 साल से पुरानी इमारतों की जियो-टैगिंग करे। उसकी सूची सार्वजनिक करे, नोटिस चिपकाने से आगे बढ़कर बिजली-पानी काटकर खाली कराए और मालिक को नब्बे दिन में रेट्रोफिटिंग या री-डेवलपमेंट का विकल्प दे, जिसके लिए हरियाणा में पहले से मौजूद हाउसिंग बोर्ड की सब्सिडी को जोड़ा जा सकता है।

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