Wednesday, September 9, 2026

वायु स्वच्छता के लिए नागरिकों की सक्रिय सहभागिता जरूरी


अशोक मिश्र

देश के 130 शहरों में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम यानी एनसीएपी के तहत शहरों की कार्य योजना के क्रियान्वयन के आधार पर पर्यावरण मंत्रालय द्वारा स्वच्छ वायु सर्वेक्षण कराया जाता है। इस साल सर्वेक्षण में हरियाणा की स्थिति मिश्रित रही। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में फरीदाबाद ने उल्लेखनीय सुधार दिखाते हुए देशभर में 14वां स्थान हासिल किया। यह शहर 2023 में 47वें पायदान पर था। फरीदाबाद ने दिल्ली को भी पीछे छोड़ दिया, जो इसी श्रेणी में 21वें स्थान पर रहा। 

वहीं चंडीगढ़ इस बार 27वें से छलांग लगाकर आठवें स्थान पर पहुंच गया। इससे स्पष्ट है कि एनसीआर से सटे हरियाणा के शहरों में सुधार की गति धीमी है। सरकारी दस्तावेजों में ही वाहन प्रदूषण, औद्योगिक प्रदूषण, सड़कों और खुले क्षेत्रों की धूल, निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से धूल, बायोमास जलाना, कृषि पराली जलाना, नगर ठोस कचरा जलाना और लैंडफिल में आग जैसे कारण गिनाए गए हैं। खेती-किसानी के संदर्भ में अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाना दिल्ली एनसीआर के संकट का बड़ा कारण है। 

फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, सोनीपत में अनियंत्रित निर्माण, बिना ढके मलबा परिवहन और कच्ची सड़कों से उड़ती धूल पीएम 10 का स्थायी स्रोत बन गई है। फरीदाबाद, पानीपत, गुरुग्राम, धारूहेड़ा बेल्ट में थर्मल पावर प्लांट, ईंट भट्ठे, टेक्सटाइल और रसायन उद्योगों से सल्फर डाईऑक्साइड और नाइट्रोजन आॅक्साइड निकलते हैं जो हवा में अमोनियम सल्फेट जैसे सेकेंडरी प्रदूषक बनाते हैं। 

एक अध्ययन में कहा गया कि फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत में पीएम 2.5 का लगभग एक तिहाई हिस्सा (33-34 प्रतिशत) इसी सेकेंडरी प्रदूषण से आता है, जो केवल सर्दियों का नहीं बल्कि संरचनात्मक स्थायी संकट है। राज्य में प्रदूषण रोकने के लिए लोगों की सहभागिता अत्यंत जरूरी है। सरकार अकेले इस समस्या से नहीं निपट सकती। नागरिकों को वाहन कम चलाने, सार्वजनिक परिवहन अपनाने, घरों में ऊर्जा बचत करने, कचरा न जलाने और निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण का ध्यान रखने की जरूरत है। 

जागरूकता अभियान, स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा और स्थानीय स्तर पर निगरानी समितियां बनाई जाएं तो प्रभावशाली परिणाम मिल सकते हैं।  जन भागीदारी के बिना कोई भी योजना अधूरी रह जाती है। वायु प्रदूषण रोक पाने में हरियाणा सरकार कई मायनों में नाकाम रही है। सर्वेक्षण में कुछ सुधार दिखने के बावजूद वास्तविक वायु गुणवत्ता खराब बनी हुई है। सभी जिले राष्ट्रीय मानकों से अधिक प्रदूषित हैं। सर्दियों में स्थिति गंभीर हो जाती है और कई शहर रेड जोन में चले जाते हैं। यह चुनौती सामूहिक जिम्मेदारी की है जिसमें सरकार, किसान, उद्योगपति और आम नागरिक सभी की सक्रिय भूमिका अनिवार्य है।


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