अशोक मिश्रहरियाणा की सैनी सरकार पिछले साल 28 जनवरी से 14 फरवरी तक उत्तराखंड में आयोजित हुए 38वें राष्ट्रीय खेलों के पदक विजेताओं को सम्मानित करने जा रही है। पिछले साल हुए राष्ट्रीय खेल में हरियाणा के खिलाड़ियों ने 48 स्वर्ण, 47 रजत और 58 कांस्य पदक जीते थे। खेल चाहे अंतर्राष्ट्रीय स्तर का हो या राष्ट्रीय स्तर का, हरियाणा के खिलाड़ी पदक जीतने में सबसे आगे रहते हैं। हरियाणा के खिलाड़ियों का जोश और जुनून खेल प्रतिस्पर्धाओं में देखते ही बनता है।
वैसे भी अन्य राज्यों की अपेक्षा हरियाणा अपने खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने, उनके लिए सुविधाएं मुहैया कराने और उन्हें पुरस्कार देने के मामले में सबसे ज्यादा खर्च करने वाला राज्य है। सरकार ने तो पूरे राज्य में डेढ़ हजार खेल नर्सरियां खोल रखी हैं। इन नर्सरियों में 37 हजार से अधिक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। पांच सौ खेल नर्सरियों को खोलने की अनुमति खेल विभाग ने मांगी है। सैनी सरकार बहुत जल्दी राज्य में खेल नर्सरियों की संख्या तीन हजार से अधिक करने जा रही है।
इन नर्सरियों में बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यही वजह है कि सभी तरह की प्रतिस्पर्धाओं में हरियाणा के खिलाड़ी आगे रहते हैं। हरियाणा के सबसे ज्यादा खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश का नाम विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में रोशन किया है जिनमें भाला फेंक में पानीपत के नीरज चोपड़ा, कुश्ती में सोनीपत के योगेश्वर दत्त और रवि कुमार दहिया, झज्जर के बजरंग पुनिया, रोहतक की साक्षी मलिक, विनेश फोगाट, बबीता फोगाट, गीता फोगाट, संग्राम सिंह आदि प्रमुख हैं।
मुक्केबाजी में विजेंद्र सिंह, विकास कृष्ण यादव, मनोज कुमार, अमित पंघाल, अखिल कुमार, स्वीटी बूरा, नीतू घनघस का नाम उल्लेखनीय है। हाकी में कुरुक्षेत्र की रानी रामपाल, सिरसा की सविता पूनिया, नवजोत कौर, नवनीत कौर, मोनिका मलिक, नेहा गोयल का नाम गर्व के साथ लिया जाता है। निशानेबाजी में झज्जर की मनु भाकर, यशस्विनी देसवाल, अमन, सर्वजोत सिंह और पैरालिंपिक सुमित अंतिल, मनीष नरवाल, अमित सरोहा, प्रणव सुरमा, नितेश कुमार प्रमुख हैं। पर्वतारोहण में संतोष यादव, ममता सौदा, अनीता कुंडू आदि ने प्रदेश को गौरव दिलाया है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2014 से लेकर अब तक लगभग 709 करोड़ रुपये करीब 17 हजार खिलाड़ियों को पुरस्कार देने पर खर्च किए हैं। पिछले साल से अब तक 662 खिलाड़ियों को 109 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जा चुकी है। हरियाणा की खेल नीतियां खिलाड़ियों को बहुत भा रही हैं। सरकार हर स्तर का पुरस्कार जीतने वाले खिलाड़ी को प्रोत्साहित जरूर करती है। यही कारण है कि दूसरे राज्यों ने भी हरियाणा की खेल नीतियों का अनुसरण करना शुरू कर दिया है, ताकि उनके यहां भी खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिले।

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