अशोक मिश्र
दिल्ली एनसीआर में हर साल प्रदूषण की स्थिति काफी गंभीर हो जाती है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रदूषण के चलते लोगों का दम घुटने लगता है। बच्चे और बूढ़े हलकान हो जाते हैं। हरियाणा ने अब इससे निजात पाने की ओर अपने कदम बढ़ा दिए हैं। निकट भविष्य में हरित विकास की ओर बढ़ा कदम उसे प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाएगा। हरियाणा सरकार 2030 तक अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों को स्वच्छ और नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने की दिशा में अग्रसर है।राज्य सरकार अगले चार वर्ष तक सरकारी बसों में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी इलेक्ट्रिक बसों की करने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए पूरे राज्य में 789 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन और पॉइंट सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला में ई-बसें और ई-आटो सड़कों पर उतर चुके हैं। चार्जिंग स्टेशनों का नेटवर्क धीरे-धीरे फैल रहा है। अगर नीतियों का साथ मिला तो हरियाणा अगले पांच साल में देश का ग्रीन मोबिलिटी हब बन सकता है। हरियाणा ने अब तय कर लिया है कि गुरुग्राम-दिल्ली की जहरीली हवा, फरीदाबाद की फैक्ट्रियों से निकलते धुएं से वह निजात पाकर रहेगा।
राज्य में विकास का रंग अब हरा हो चला है। ऐसे में हरित परिवहन प्रदेश के लिए मजबूरी भी है और सबसे बड़ा अवसर भी।हरियाणा वैसे भी देश का आटो हब है। मानेसर, गुरुग्राम, फरीदाबाद और कुंडली में पहले से ही दुनिया की बड़ी आटो कंपनियां हैं। अब यही कंपनियां इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन की तरफ मुड़ रही हैं। इन कंपनियों के सहारे राज्य को हरित विकास की रफ्तार को तेज किया जा सकता है। हरित परिवहन केवल प्रदूषण घटाएगा ही नहीं, यह लाखों हाथों को काम भी देगा। ईवी बैटरी, मोटर, कंट्रोलर और हाइड्रोजन फ्यूल सेल के निर्माण में इंजीनियरों से लेकर आईटीआई पास तकनीशियनों तक की जरूरत होगी।
अनुमान है कि मानेसर-धरुहेड़ा की आटो बेल्ट में ही अगले कुछ सालों में 50 से 70 हजार प्रत्यक्ष नौकरियां बन सकती हैं। इसके साथ चार्जिंग स्टेशन और हाइड्रोजन रीफ्यूलिंग स्टेशन लगाने, चलाने और उनकी देखरेख के लिए 20 हजार लोगों को काम मिलेगा। कुल मिलाकर आने वाले 5 से 7 साल में हरित परिवहन के कारण हरियाणा में 1.2 से 1.5 लाख नए रोजगार सृजित हो सकते हैं और इनमें से बड़ी संख्या उन युवाओं के लिए होगी जिन्होंने 12वीं या आईटीआई की है।
नीति आयोग के एक अनुमान के अनुसार यदि हरियाणा हरित परिवहन में एक लाख करोड़ रुपये का निवेश करता है तो 2030 तक राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 8 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी हो सकती है। मजबूत नीतिगत फैसलों और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश के कारण, राज्य में हरित परिवहन का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल है।
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