अशोक मिश्र
हरियाणा सरकार ने वन संरक्षण, हरित आवरण बढ़ाने और पौधरोपण अभियान में जनभागीदारी बढ़ाने की मुहिम तेज कर दी है। सीएम नायब सिंह सैनी व्यक्तिगत रूप से भी वन क्षेत्र बढ़ाने के प्रयासों की मानिटरिंग कर रहे हैं। वन विभाग की समीक्षा बैठक में भी उन्होंने प्रदेश में हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। हरियाणा ने पहली बार सौ करोड़ रुपये के ग्रीन क्लाइमेट रेजिलिएंट फंड के बजट का प्रावधान किया है। राज्य सरकार ने प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राज्य में 2.10 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।यह अभियान ‘एक पेड़ मां के नाम’ के तहत चलाया जा रहा है। इसके बावजूद हरियाणा और पंजाब में हरित आवरण में गिरावट देखी जा रही है। हरियाणा में केवल 7.48 प्रतिशत वन और वृक्ष आवरण है, जबकि पंजाब में यह और भी कम यानी 6.59 प्रतिशत है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा का कुल वन क्षेत्र 1,603 वर्ग किमी है जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र 44,212 वर्ग किमी का लगभग 3.63 प्रतिशत है। यही वजह है कि हरियाणा को अक्सर खेतों और फैक्ट्रियों का प्रदेश कहा जाता है, जंगलों का नहीं।
हरियाणा सरकार हर साल जुलाई में वन महोत्सव मनाती है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों के तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण करती है। लेकिन इस मामले में सबसे जरूरी यह है कि वन महोत्सव या दूसरे किसी अवसरों पक केवल पौधा लगाना ही काफी नहीं है। जब तक रोपा गया पौधा जड़ पकड़कर पेड़ का रुप न ले ले, तब तक उसकी देखभाल करना भी जरूरी है। अगर रोपे गए पौधे की देखभाल नहीं की गई, तो पौधे को गाय, भैंस और बकरी जैसे पशु चट कर जाते हैं।
राज्य सरकार ने कैंपा यानी कि क्षतिपूर्ति वनीकरण कोष प्रबंधन और योजना प्राधिकरण योजना के तहत बीस लाख पौधों को रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हरियाणा में भूजल घट रहा है, गर्मी बढ़ रही है। ऐसे में खेजड़ी, शीशम, नीम और बड़ जैसे स्थानीय प्रजातियों पर फोकस जरूरी है। साथ ही शहरी क्षेत्रों में पार्क, सड़क किनारे और स्कूल-कॉलेज की खाली जमीन को ‘मियावाकी वन’ में बदला जा सकता है।
मियावाकी जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित एक पौधरोपण तकनीक है। इसके तहत बहुत छोटे से शहरी भूखंड में भी देशी पौधों को अत्यधिक सघन रूप से लगाया जाता है। यह सामान्य पारंपरिक जंगलों की तुलना में दस गुना तेजी से बढ़ते हैं और 30 गुना अधिक घने होते हैं। वन महोत्सव ने जनजागरूकता और पौधारोपण में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन जब तक लगाए गए पौधों को वन का दर्जा नहीं मिलेगा और समुदाय की भागीदारी नहीं बढ़ेगी, तब तक हरियाणा के हरित मानचित्र पर बड़ा बदलाव नहीं आएगा।
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