Sunday, February 8, 2026

मां की मेहनत से वैज्ञानिक बने थामस अल्वा एडिसन

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

मां के लिए दुनिया की विभिन्न भाषाओं में जितने भी शब्द प्रचलित हैं, वह उस भाषा का सबसे पवित्र शब्द होता है। मां से महान दूसरा कोई नहीं हो सकता है। मां अपने बच्चे के लिए दुनिया से लड़ सकती है। यही वजह है कि पूत कपूत हो सकता है, लेकिन माता कुमाता नहीं हो सकती है। ऐसी मां थीं थामस अल्वा एडिसन की मां। 

उन्होंने अपनी सूझबूझ और बेटे के प्रति प्रेम के चलते सदी को महान वैज्ञानिक प्रदान किया। अमेरिका में 11 फरवरी 1847 में पैदा हुए थामस अल्वा एडिसन प्रारंभिक जीवन में मंद बुद्धि के थे। बात तब की है, जब थामस प्राइमरी स्कूल में पढ़ते थे। एक दिन उनके अध्यापक ने एडिसन को एक पत्र देते हुए कहा कि इसे अपनी मां को दे देना। उनकी मां नैन्सी मैथ्यूज इलियट ने जब वह पत्र पढ़ा, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। 

अपनी मां को रोता देखकर एडिसन ने पूछा कि मां, इसमें क्या लिखा है? उनकी मां ने फीकी मुस्कान के साथ कहा कि इसमें लिखा है कि आपका बच्चा कुछ ज्यादा ही होशियार है। हमारा स्कूल उसके स्तर का नहीं है, इसलिए हम उसे नहीं पढ़ा सकते हैं। इसके बाद एडिसन को पढ़ाने की जिम्मेदारी उनकी मां ने संभाली। शुरुआत में उन्हें बहुत परेशानी हुई, लेकिन अंतत: वह अपने उद्देश्य में सफल हो गईं। 

उनके बेटे ने इलेक्ट्रिक बल्ब जैसे कई महान आविष्कार किए। वह एक अमीर व्यवसायी बन गए। इसी बीच उनकी मां की मौत हो गई। एक दिन जब वह अपने घर में पुरानी चीजों को देख रहे थे, तो उनके हाथ पुराना पत्र लगा। उन्होंने खोलकर पढ़ा। उसमें लिखा था कि आपका बेटा बौद्धिक तौर पर काफी कमजोर है, उसे स्कूल न भेजें। यह पढ़कर एडिसन काफी देर तक रोते रहे।

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