Sunday, February 8, 2026

मोबाइल फोन का अधिक उपयोग बच्चों का विकास कर रहा बाधित

अशोक मिश्र

कोई भी आविष्कार मानव समाज के लिए बुरा नहीं होता है, सिवाय परमाणु बम के आविष्कार के। अभी तक तोप, तलवार, बम, पिस्तौल जैसे अस्त्र-शस्त्र को ही मानव समाज के लिए घातक माना गया है। यह भले ही देश की सुरक्षा में अब उपयोग किए जाते हैं, लेकिन यह भी सच है कि मानव की हत्या में ही काम आता हैं। अगर इन सब हथियारों की खोज नहीं हुई होती, तो शायद मानव समाज में अपेक्षाकृत ज्यादा शांति होती। इन सबके अलावा जितने भी आविष्कार हुए हैं, वह सब किसी न किसी रूप में मानव समाज के विकास में योगदान ही करते रहे हैं। लेकिन मानव समाज के लिए लाभदायक माने जाने वाली तकनीक का यदि दुरुपयोग करने पर कोई व्यक्ति उतारू हो जाए, तो समाज को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। अब मोबाइल फोन को ही लें। 

फोन का आविष्कार दूरदराज में बैठे लोगों से संवाद के लिए हुआ था। बात में इसमें सुविधाएं बढ़ती गई और इंटरनेट ने सूचनाओं का एक विशाल संसार खोल दिया। इसका उपयोग ज्ञान के लिए किया जाने लगा। यदि मोबाइल फोन का सही से इस्तेमाल किया जाए, तो यह छात्र-छात्राओं के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। यह बच्चों को भरपूर जानकारियां उपलब्ध करा सकता है। इसका उपयोग करके बच्चे अपने सिलेबस से इतर जानकारियां हासिल करके अपना ज्ञान बढ़ा सकते हैं। कोरोना काल में तो बच्चों ने मोबाइल के सहारे ही अपनी पढ़ाई जारी रखी थी। 

आनलाइन क्लासेस की वजह से ही उनका पाठ्यक्रम पूरा हो पाया था और बच्चे घर में रहकर सुरक्षित भी रहे। लेकिन जब इसका दुरुपयोग होने लगा, तो अभिभावकों को चिंता हुई। बच्चे पढ़ाई या मनोरंजन के नाम पर डिजिटल नशे का शिकार होने लगे। डिटिजल नशा उनके सिर पर इस कदर चढ़ा कि यदि मां-पिता ने उन्हें मोबाइल से दूर रखने का प्रयास किया, तो उन्होंने आत्महत्या जैसे घातक कदम उठाने से भी परहेज नहीं किया। गाजियाबाद की तीन बहनों की आत्महत्या एक गंभीर सवाल खड़े करती है। देश में बहुत सारे बच्चे हैं जो डिजिटल नशे के चलते अपना जीवन बरबाद कर रहे हैं। ज्यादा समय तक आन स्क्रीन रहने से बच्चों का शारीरिक-मानसिक विकास रुक जाता है। 

वह कई तरह की बीमारियों के शिकार होने लगते हैं। वह मोबाइल को ही अपना सच्चा साथी समझकर बाहरी दुनिया से कटने लगते हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वह समाज और परिवार के साथ अपना सामांजस्य नहीं बिठा पाते हैं। ऐसी हालत में वह मेमोरी लॉस, चिड़चिड़ापन, विद्रोही, एकाग्रता की कमी और मोटापे का शिकार हो जाते हैं। मनोचिकित्सकों का यह भी मानना है कि कई बार बच्चे मानसिक तनाव को दूर करने के लिए मोबाइल का सहारा लेते हैं, लेकिन बाद में इसके गुलाम होकर रह जाते हैं।

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