Friday, September 11, 2026

यहां कोई किसी का नहीं होता है

बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

बौद्ध जातक कथाओं में अश्मक महाजनपद के राजा अस्सक की एक कथा है। प्राचीन काल में अश्मक राज्य वर्तमान महाराष्ट्र और तेलंगाना क्षेत्र के बीच में गोदावरी नदी के तट पर स्थित था। पोटली इसकी राजधानी थी। राजा अस्सक की महारानी उब्बरा बहुत ही सुंदर थी। एक बार वह बीमार पड़ी तो सबने उसके स्वस्थ होने की प्रार्थना की। 

महारानी ने भी प्रार्थना की कि या तो मृत्यु हो जाए या फिर वह स्वस्थ हो जाए। लेकिन कोई प्रार्थना काम नहीं आई। उब्बरा की मौत हो गई। महाराज उब्बरा से बहुत अधिक प्रेम करते थे। वह अपनी महारानी की मृत्यु के बाद लगभग विक्षिप्त हो गए। वह केवल रोते रहते थे। महारानी का शव तेल में भिगोकर रख दिया गया ताकि खराब न हो। उन्हीं दिनों बोधिसत्व अश्मक राज्य में पहुंचे और उन्होंने माणवक नामक आदमी से पूछा कि पूरे राज्य में यह उदासी क्यों छाई हुई है। माणवक  ने सारी कथा सुनाई। तब बोधिसत्व ने कहा कि अपने राजा से जाकर कहो कि मैं जानता हूं, उनकी उब्बरा कहां है। यह बात सुनकर राजा बहुत प्रसन्न हुआ। 

वह पालकी पर बैठकर बोधिसत्व के पास पहुंचा। उसने आतुरता से पूछा कि मेरी उब्बरा कहां है? बोधिसत्व ने योगबल से गुबरैले के रूप में जन्मी उब्बरी को वहां बुलाया और राजा को दिखाते हुए कहा कि यह देखो, तुम्हारी उब्बरा जो उस गुबरैले के पीछे आकर्षित होकर भागती जा रही है। बोधिसत्व ने गुबरी से पूछा, उब्बरा पूर्व जन्म में तुम कौन थी? गुबरी ने जवाब दिया-मैं राजा अस्सक की पटरानी थी। उस जन्म में मेरा पति परमेश्वर था। लेकिन इस जन्म में यह गुबरैला ही मेरा साथी है। 

तब बोधिसत्व ने राजा से कहा कि यहां कोई किसी का नहीं है। जब तक जीवन है,तब तक सभी अपने हैं। जीवन खत्म होने के बाद सारे रिश्ते नाते टूट जाते हैं। यहां कोई किसी का नहीं होता है। यह सुनकर राजा अस्सक को अपनी भूल का पता चला। उसने मोह त्यागकर उब्बरा का दाह संस्कार किया और अपनी प्रजा के हित में लग गया।

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