अशोक मिश्रखेल और युद्ध के बीच बहुत ही गहरा संबंध हैं। पहले खेल शुरू हुए या युद्ध, यह कह पाना तो बहुत मुश्किल है, लेकिन यह सही है कि प्राचीन काल में खेल भी युद्ध का ही एक प्रारूप हुआ करते थे। दोनों में अंतर केवल इतना है कि खेल एक निश्चित नियम और सौहार्दपूर्ण भावना से जुड़े होते हैं, लेकिन युद्ध का वैसे तो कोई नियम नहीं होता है और यह मानवघाती भी होता है। खिलाड़ी का एक ही लक्ष्य होता है प्रतिद्वंद्वी को हर हालत में पराजित करना, लेकिन युद्ध में प्रतिद्वंद्वी को मौत के घाट उतारना एकमात्र लक्ष्य होता है। ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों को विशेष खानपान की जरूरत होती है।
अपने प्रतिस्पर्धी को हराने में वह तभी सक्षम होंगे, जब वह हष्टपुष्ट और शारीरिक-मानसिक रूप से सक्षम होंगे। हरियाणा सरकार ने करीब एक साल पहले खिलाड़ियों की डाइट मनी में पांच सौ रुपये की बढ़ोतरी का ऐलान किया था, लेकिन हकीकत में यह बढ़ोतरी आज तक नहीं हुई है। एक अनुमान के मुताबिक प्रदेश की डेढ़ हजार खेल नर्सरियों में साढ़े सैंतीस हजार खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं।
ऐसी स्थिति में इन खिलाड़ियों को अपनी खुराक को संतुलित रखने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह बात सही है कि हरियाणा ने देशी और विदेशी खेल प्रतिस्पर्धाओं में देश में सबसे ज्यादा पदक जीते हैं। राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में प्रदेश के खिलाड़ियों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। सबसे ज्यादा पदक जीते हैं, लेकिन यदि इन खिलाड़ियों को अच्छी डाइट नहीं मिलेगी, तो यह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे करेंगे। इतना ही नहीं, इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने वाले प्रशिक्षकों (कोचों) के वेतनमान में वृद्धि का ऐलान सरकार ने किया था। इन कोचों के वेतनमान में अभी तक कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
प्रदेश में संचालित डेढ़ हजार खेल नर्सरियों में से एक हजार नर्सरियों का संचालन निजी तौर पर होता है। इन एक हजार खेल नर्सरियों का संचालन निजी संस्थाएं और पंचायतों द्वारा होता है। यदि सरकार इन प्रशिक्षकों का वेतनमान समय पर बढ़ा दिया गया होता, तो शायद यह कोच अपने खिलाड़ियों को बड़े उत्साह के साथ प्रशिक्षण देते। राज्य सरकार ने कनिष्ठ प्रशिक्षकों का वेतन बीस हजार से पच्चीस हजार और वरिष्ठ प्रशिक्षकों का वेतन 25 हजार से तीस हजार करने का वायदा किया था, लेकिन अभी तक वायदा पूरा न होने की वजह से प्रशिक्षकों में भारी असंतोष है।
सरकारी अधिकारियों की कामकाज में लापरवाही का आलम यह है कि पांच सौ खेल नर्सरियों को खोलने की घोषणा प्रदेश सरकार ने 2024-25 में की थी, यह खेल नर्सरियां आजतक नहीं खोली जा सकी हैं। पांच सौ खेल नर्सरियों को खोलने की फाइल खेल विभाग, वित्त विभाग और सीएमओ के बीच घूम रही है।

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