Monday, September 14, 2026

सड़कों पर घूमते लावारिस कुत्तों का बढ़ता जा रहा आतंक

अशोक मिश्र

शनिवार को बल्लभगढ़ के शाहुपुरा में दो छोटी बहनों को आवारा कुत्तों ने घेर लिया। दोनों ने तुरंत रैंप पर चढ़कर अपनी जान बचाई। सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें करीब छह साल के बच्चे के पीछे कुत्ता दौड़ता नजर आ रहा है और बच्चा ‘मम्मी बचाओ, मम्मी बचाओ’ चिल्ला रहा है। उसकी आवाज सुनकर घरवाले बाहर निकले और कुत्ते को भगाया। गनीमत यह रही कि बच्चे को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। 

यह घटना अकेली नहीं है। प्रदेश भर में कुत्तों के काटने की घटनाएं बढ़ रही हैं और लोग भय के साये में जीने को मजबूर हैं। आज स्थिति यह है कि गली हो या बाजार, दिन हो या रात, लोगों को एक अनजाना डर घेरे रहता है। झुंड में घूमते आवारा कुत्ते अचानक किसी अकेले राहगीर, स्कूली बच्चे या बुजुर्ग पर हमला कर देते हैं। डॉग बाइट को लेकर अब शासन स्तर पर हलचल तेज हुई है, उन्होंने कुत्तों को झुंड बनाने से रोकने और जनसंख्या कम करने के उपाय करने शुरू कर दिए हैं। 

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद हरियाणा के शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने एक विस्तृत कार्ययोजना तय की है जिसके तहत प्रदेश के सभी 87 निकायों में कम से कम पांच हजार कुत्तों की क्षमता वाले आश्रय स्थल बनाए जाएंगे। सरकार का कहना है कि उसके पास अभी सभी कुत्तों को एक साथ शेल्टर में शिफ्ट करने के संसाधन नहीं हैं, इसलिए फिलहाल फोकस नसबंदी पर रहेगा। प्रदेश सरकार और स्थानीय निकाय आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए मुख्य रूप से एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी कार्यक्रम चला रहे हैं। इस कार्यक्रम के तहत नगर निगम और नगर परिषदें एजेंसियों को ठेका देकर कुत्तों को पकड़ती हैं, उनकी नसबंदी कराती हैं, रेबीज के टीके लगाती हैं, टैगिंग करती हैं और फिर उन्हें उसी क्षेत्र में छोड़ देती हैं जहां से पकड़ा गया था। 

एबीसी नियम 2023 के तहत यह काम वैज्ञानिक और मानवीय तरीके से करने का प्रावधान है। केंद्र सरकार की 'स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट 2026-27' योजना के तहत 3000 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। इसके तहत देशभर में 30 सितंबर तक 2.46 करोड़ कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। 

हरियाणा को लगभग 58 हजार कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य मिला है। जमीन पर काम शुरू भी हुआ है। शाहुपुरा जैसी घटनाएं साफ दर्शाती हैं कि आम आदमी अभी असुरक्षित महसूस कर रहा है। सरकार की योजनाएं और प्रशासनिक गतिविधि हर जगह मौजूद हैं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन और निरंतरता जरूरी है। नसबंदी अभियान को तेज करना, आक्रामक कुत्तों को तुरंत हटाना, शिकायतों का त्वरित निस्तारण और जागरूकता बढ़ाना ही इस आतंक से राहत दिलाने का रास्ता है। लोगों को भी इस मामले में जागरूक होना होगा।

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