Showing posts with label #महात्मा बुद्ध #साजिश #प्रवचन #धर्मसभा. Show all posts
Showing posts with label #महात्मा बुद्ध #साजिश #प्रवचन #धर्मसभा. Show all posts

Friday, October 9, 2026

सच के आगे झूठ ज्यादा देर नहीं टिकता


बोधिवृक्ष

अशोक मिश्र

महात्मा बुद्ध के जीवन की राह कभी आसान नहीं रही। वह परस्पर विरोधी शक्तियों से आजीवन संघर्ष करते रहे। कुछ लोग समझते हैं कि बुद्ध को बुद्धत्व प्राप्त होने के बाद हर जगह मान-सम्मान मिलता रहा। उनके अनुयायी हमेशा उनकी सुरक्षा में लगे रहे। जो भी उनके सामने आता था, वह उनका अनुयायी बन जाता था। ऐसा कुछ नहीं था। बुद्ध के बहुत सारे विरोधी थे और वह उनके खिलाफ कोई न कोई साजिश रचते रहते थे। 

एक बार महात्मा बुद्ध एक ऐसे राज्य से गुजर रहे थे जिसमें उनको नापंसद करने वाले लोगों की संख्या बहुत ज्यादा थी। वह तथागत को परेशान करने, उन पर लांक्षन लगाने का कोई भी अवसर चूकते नहीं थे। जब उन्हें यह बता चला कि गौतम बुद्ध नगर में प्रवचन देने आए हैं। तब उन्होंने एक षड्यंत्र रचा। उन्होंने एक महिला को तैयार किया और वह महिला पेट में कपड़े लपेटकर गर्भवती स्त्री की तरह उस जगह पहुंची, जहां धर्म सभा में महात्मा बुद्ध प्रवचन दे रहे थे। 

वह धर्मसभा में जाकर चिल्लाने लगी, देखो इस ढोंगी आदमी को। यह बहुत बड़ा महात्मा बना फिरता है। इसने मुझे गर्भवती कर दिया है और मुझे अपनाता भी नहीं है। अब यहां बैठा उपदेश कर रहा है। यह सुनकर सभा में खलबली मच गई। बुद्ध का शिष्य घबराया। उनसे बुद्ध से पूछा, भगवन! अब क्या होगा? बुद्ध मुस्कुराए और बोले, झूठ कभी नहीं टिकता है। चिंता मत करो। 

संयोग से जब वह महिला सभा के सामने गरज-गरज कर बुद्ध के चरित्र हनन का प्रयास कर रही थी, तभी उसकी करधनी ढीली होकर जमीन पर गिर पड़ी। उस महिला का राज खुल गया। वह शर्मसार हो गई। उसने धर्मसभा के सामने सच्चाई स्वीकार कर ली। लोग उसे मारने-पीटने के लिए उद्यत हो गए, तब बुद्ध ने लोगों को रोकते हुए कहा कि पतित लोग पहले ही मर जाते हैं। ऐसे में शारीरिक पीड़ा देने का कोई अर्थ नहीं है। वह स्त्री लज्जित होकर वहां से चली गई।