अशोक मिश्रफरीदाबाद में चल रहा अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर हस्तशिल्प मेले में शनिवार को झूला टूटने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी। शनिवार को हुए हादसे में इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की मौत हो गई और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद मार्च में ही सेवानिवृत्त होने वाले थे। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि प्रारंभिक जांच में झूले में गड़बड़ी पाई गई है।
सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए विभिन्न विभागों के अधिकारियों की एक नौ सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। कहा तो यह भी जा रहा है कि कमेटी ने मेले में लगने वाले झूलों की जांच ही नहीं की। जिस मेले में देश-विदेश से सैलानियों के लिए सुरक्षित बताया जा रहा था, उसी मेले में हुआ यह हादसा सारी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। कहा जा रहा है कि मेले में लगने वाले झूलों और अन्य मशीनों की रोज चेकिंग होनी थी। लेकिन इस मामले में काफी लापरवाही बरती गई। नियम बताते हैं कि किसी भी जगह पर जब कोई भारी झूला लगाया जाता है, तो उस जगह की मिट्टी की जांच की जाती है।
यह पता लगाया जाता है कि झूले की नींव कितनी टिकाऊ होगी। मेला शुरू होने से पहले मिट्टी की जांच हुई थी या नहीं, यह भी स्पष्ट नहीं है। कहा तो यही जा रहा है कि हरियाणा टूरिज्म ने मानकों पर ध्यान ही नहीं दिया। जिस जगह पर झूला लगाया गया था, उस जगह की मिट्टी भुरभुरी बताई जा रही है। ऐसी जमीन पर मजबूती के साथ झूला लगा पाना बहुत मुश्किल है। हालांकि सरकार ने हादसे की जांच के लिए कमेटी बना दी है। यह कमेटी जल्दी ही अपनी रिपोर्ट पेश कर देगी।
हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, ऐसी आशा है। दरअसल, जितने बड़े पैमाने पर सूरजकुंड मेला आयोजित किया जा रहा है, उसके लिए बहुत अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। सूरजकुंड मेले में प्रति दिन हजारों लोग आते हैं। लोग मेले में खरीदारी करने आते हैं। इसी बहाने वह अपना मन बहलाव करते हैं। झूले और अन्य आयोजनों के जरिये मनोरंजन करना उनका मुख्य उद्देश्य होता है। मेले में आयोजित होने वाले विभिन्न तरह के कार्यक्रमों को देखकर वह प्रसन्न होते हैं।
मेले में आने वाले लोग दूसरे प्रांतों के लोगों से मिलकर उनके बारे में जानकारी हासिल करते हैं। वहीं दूसरे प्रदेश के लोग भी हरियाणा की कला, संस्कृति और खानपान से परिचित होते हैं। सूरजकुंड मेले को देखकर ऐसा लगने लगता है कि एक छोटा भारत यहां बसा दिया गया हो। ऐसी स्थिति में विभिन्न संस्कृतियों के मेल-मिलाप से देशभक्ति की भावना प्रबल होती है। ऐसे महत्वपूर्ण अवसर पर यदि कोई हादसा हो जाए, तो लोगों में भय का संचार होता है और वह मेले में आने से परहेज करने लगते हैं।

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