अशोक मिश्र
सम्राट अशोक का सगा भाई तो तिष्य था, लेकिन सौतेले भाइयों को मिलाकर सौ भाई बताए जाते हैं। सम्राट बिंदुसार का सबसे बड़ा भाई सुसीम था। बिंदुसार युवराज सुसीम को ही उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। लेकिन अशोक खुद सम्राट बनना चाहता था। सुसीम तक्षसिला का राज्यपाल था। वह खुद अशोक से घृणा करता था। लेकिन सत्ता संघर्ष में उसने सुसीम की हत्या कर दी थी।जब सुसीम की हत्या हुई थी, तब उसकी पत्नी गर्भवती थी। कहा तो यह जाता है कि अशोक ने अपने 99 भाइयों की हत्या कर दी थी। इसीलिए उसे चंड अशोक कहा जाने लगा था। कलिंग युद्ध के बाद हुए रक्तपात को देखकर अशोक का मन व्यथित हो उठा। वह बेचैनी में इधर उधर भटकने लगा। उसे कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा था। एक दिन वह बाग में बैठा हुआ था।
उसने देखा कि एक युवा साधु के चेहरे पर असीम शांति है। उसका चेहरा चमक रहा था। अशोक उसके पास गया, तो साधु से परिचय पूछा। उस युवा साधु ने कहा कि मैं निग्रोध कुमार हूं। सुसीम का पुत्र। जब आपने मेरे पिता की हत्या की थी, तब मैं अपनी मां के गर्भ में था। उसके बाद मेरी मां को काफी भटकना पड़ा। मेरी मां को एक बौद्ध भिक्षु ने शरण दी। मेरा जन्म वहीं हुआ। अशोक ने कहा कि तब तो तुम मुझ से घृणा करते होगे।
उस साधु ने कहा कि घृणा क्या होती है, यह मैं नहीं जानता हूं। मैं तो प्रेम करना जानता हूं। मैं समस्त प्राणियों को प्रेम करता हूं। अशोक ने कहा कि मुझे माफ कर दो। मेरे मन को शांति नहीं मिल रही है। साधु ने कहा कि तुम बुद्ध की शरण में जाओ। वहीं शांति संभव है। इसके बाद अशोक ने बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया। उसने लोककल्याण के लिए बहुत सारे काम किए। तब उसे प्रियदर्शी अशोक के नाम से जाना गया।

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