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Thursday, August 28, 2025

सरकार को नशे की जड़ पर करना होगा प्रहार

अशोक मिश्र

मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, विधानसभा अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण और मंत्रियों सहित भाजपा विधायकों ने एमएलए हॉस्टल से विधानसभा तक नशे के खिलाफ साइकिल रैली निकाली। विपक्षी विधायकों के इस रैली में शामिल न होने पर मुख्यमंत्री ने उन पर तंज भी कसा। कहा कि उन्हें प्रदेश की समस्याओं से कोई लेना देना नहीं है। 

सीएम ने नशे के खिलाफ निकाली गई साइकिल रैली को सफल बताते हुए कहा कि प्रदेश में नशे के खिलाफ वातावरण बन रहा है। लोग इस तरह के आयोजनों से प्रेरणा ले रहे हैं। सीएम सैनी प्रदेश में इस तरह के आयोजन पहले भी करते रहे हैं। अप्रैल महीने में भी सीएम सैनी साइक्लोथॉन 2.0 का आयोजन कर चुके हैं। इस साइक्लोथॉन के दौरान हजारों लोग साइकिल से प्रदेश के कई शहरों में जाकर लोगों को नशे से दूर रहने की प्रेरणा दे चुके हैं। सीएम इस दौरान कई शहरों में साइक्लोथॉन को हरी झंडी दिखाकर रवाना कर चुके हैं। सवाल यह है कि इस तरह के आयोजनों से कितने  लोगों को प्रेरणा मिली, कितने लोगों ने नशे से दूर रहने का संकल्प लिया और नशे से दूर हो गए। अक्सर देखा जाता है कि ऐसे कार्यक्रमों को सामान्य लोग एक आयोजन की तरह लेते हैं। 

रैली या सेमिनार में भाग लेते हैं और फिर अपनी सामान्य दिनचर्या में संलिप्त हो जाते हैं। हजार लोगों में कहीं एकाध लोगों का हृदय परिवर्तन होता हो, तो नहीं कहा जा सकता है। असल में ऐसे आयोजन समाज पर बहुत ज्यादा प्रभाव नहीं डाल पाते हैं। सबसे जरूरी यह है कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति को ही रोक दिया जाए। प्रदेश सरकार का कहना है कि एक जनवरी से 31 जुलाई 2025 तक कुल 21591 मामले दर्ज किए गए। इतना ही नहीं, 2046 आरोपियों को अदालत से सजा भी दिलवाई गई। 

सबसे सार्थक तरीका यही है कि कानून का पहरा इतना कड़ा कर दिया जाए कि लोगों को नशीला पदार्थ मिले ही नहीं। जो लोग नशीले पदार्थ के चलते रोगी हो गए हैं, उनका इलाज करवाया जाए। जब लोगों को नशीले पदार्थ मिलेंगे ही नहीं, लोग इस बुराई से दूर रहने को मजबूर होंगे। नए लोगों को भी इसकी लत नहीं लगेगी। दरअसल, प्रदेश में नशा तस्करी का जाल काफी बड़े पैमाने पर फैला हुआ है। यह नशा कारोबारी और नशीले पदार्थ प्रदेश की जनता के लिए मुसीबत का कारण बनते जा रहे हैं। 

सरकार को नशे की जड़ पर ही प्रहार करना होगा। नशा कारोबारियों और नशीले पदार्थ का उत्पादन करने वालों की गर्दन मरोड़नी होगी, तभी प्रदेश के लाखों युवाओं और बुजुर्गों को नशे से मुक्ति मिल सकेगी। हां, सरकार को स्कूलों के आसपास नशीले पदार्थ  बेचने वालों पर भी सख्ती से शिकंजा कसना होगा।