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Monday, August 25, 2025

हरियाणा के किसानों में घट रहा प्राकृतिक खेती के प्रति रुझान

अशोक मिश्र

दुनिया में जब भी खेती की शुरुआत हुई थी, तो वह प्राकृतिक खेती ही  थी। कई हजार साल पहले जब मानव बस्तियों के आसपास चारागाह कम पड़ने लगे और पालतू पशुओं की संख्या बढ़ने लगी, तब इंसानों ने खेती की शुरुआत की। वह अपने आसपास की जमीन पर विभिन्न प्रजाति के पौधों के बीजों का छिड़काव कर दिया करते थे। जो भी पैदा हो जाता था, उससे काम चलाते थे। लौह युग में लोहे के हल का आविष्कार होने के बाद जमीन की जुताई भी होने लगी। लेकिन एक मायने में खेती का यह स्वरूप भी प्राकृतिक ही रहा। कालांतर में पशुओं के गोबार से खाद बनाकर भी खेतों में डाला जाना लगा। 

बाद में विभिन्न किस्म के रासायनिक खादों का चलन शुरू हुआ, तो फिर खेती का स्वरूप ही बदल गया। अब रासायनिक खादों के उपयोग से होने वाले दुष्परिणाम भी सामने आने लगे हैं। अनाज में हानिकारक तत्वों की उपस्थिति ने सरकारों का ध्यान प्राकृतिक खेती की ओर गया। भाजपा सरकार ने भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए किसानों को प्रेरित करना शुरू किया। 

पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने किसानों से प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की और उनके लिए कई तरह की छूट और अनुदान की घोषणा की। मनोहर लाल सरकार ने वर्ष 2022-23 में स्थायी कृषि रणनीतिक पहल और किसान कल्याण कोष योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करना शुरू किया था। उस वर्ष हरियाणा में 5205 एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती हुई थी। हालांकि यह भी सही है कि शुरुआती दौर में जिस तरह किसानों ने प्राकृतिक खेती की ओर रुचि दिखाई, वह रुझान अब देखने को नहीं मिल रहा है। सैनी सरकार ने इस साल प्राकृतिक खेती का लक्ष्य एक लाख एकड़ रखा था, लेकिन अभी तक किसानों ने केवल 1357 एकड़ की प्राकृतिक खेती अपनाई है। 

इससे पहले साल की बात करें, तो प्रदेश में वर्ष 2024-25 में कुल 8036 एकड़ खेती हुई थी। इससे पहले वर्ष 2023-24 में 10,109 एकड़ प्राकृतिक खेती की गई थी। सैनी सरकार ने अब नए सिरे से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। अब पंचायती जमीन पर प्राकृतिक खेती कराने का निर्णय सरकार ने लिया है। इसके लिए राज्य सरकार ने गुरुग्राम में जैविक और प्राकृतिक गेहूं, धान के साथ-साथ दाल और हिसार में फल एवं सब्जियों की बिक्री को बढ़ावा देने वाली मंडियों को स्थापित करने का फैसला किया है। इससे किसानों को कई तरह की समस्याओं से निजात मिलने की उम्मीद है। इन दोनों जिलों में प्राकृतिक खेती-जैविक उत्पादों की गुणवत्ता आदि के परीक्षण के लिए एक-एक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।