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Sunday, August 24, 2025

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र को शांति से चलने देने में समझदारी

अशोक मिश्र

हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र का आगाज ऐसा ही कुछ होगा, इसकी आशंका तो थी, लेकिन छह बार विधानसभा की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ेगा, ऐसी उम्मीद कतई नहीं थी। शुक्रवार को शुरू हुए हरियाणा विधानसभा सत्र का पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। हरियाणा के विधानसभा सत्र के इतिहास में शायद यह पहला मौका है, जब विपक्ष ने इतना उग्र व्यवहार किया है। भिवानी के गांव ढाणी लक्ष्मण की शिक्षिका मनीषा की मौत को लेकर जिस तरह पुलिस ने लापरवाही बरती। 

कई दिनों तक मामला हत्या या आत्महत्या के बीच झूलता रहा। पुलिस अपनी जांच के दौरान यह तक तय नहीं कर पाई कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का। फिर पता नहीं कहां से सुसाइड नोट भी पुलिस ने बरामद कर लिया। इसने  गांव ढाणी लक्ष्मण के लोगों को उग्र कर दिया। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को तीन बार मनीषा का पोस्टमार्टम कराना पड़ा। अब मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की तैयारी की जा रही है। विपक्ष के लिए यह मुद्दा सरकार को घेरने के लिए काफी था। विपक्ष ने सदन में हंगामे के दौरान पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था कायम न होने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। 

सीएम सैनी ने भी पलटवार करते हुए कांग्रेस के शासनकाल की घटनाओं को उदारण के रूप में पेश करते हुए कानून व्यवस्था के ध्वस्त होने का दावा किया। सत्तापक्ष और विपक्ष की इस गहमागहमी के बीच न तो प्रश्नकाल हुआ और न ही शून्यकाल। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर भी चर्चा नहीं हो पाई। विपक्ष ने सदन में सरकार पर आरोप लगाया कि प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध बढ़ रहे हैं। प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हो रही है। 

अपराधियों का मनोबल बढ़ा हुआ है। वह व्यापारियों को धमकाकर रंगदारी वसूल रहे हैं। जबकि सत्ता पक्ष विपक्ष के आरोपों को इनकार कर रहा है। यह सही है कि प्रदेश में अपराध हो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर अपराध असंगठित तौर तरीके वाले हैं। सरकार काफी हद तक संगठित अपराध रोकने में सफल है। इसमें कोई दो राय नहीं है। सरकार ने कई नामी-गिरामी अपराधियों को गिरफ्तार करके उनको जेल में डाल दिया है। उनकी संपत्तियां जब्त की हैं। 

खनन माफियाओं, नशा तस्करों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई की जा रही है। लेकिन असंगठित अपराध को रोक पाना, किसी भी सरकार के वश में नहीं होता है। अब राह चलते दो लोग भिड़ जाएं और एक आदमी दूसरे वाले को गोली मार दे, तो क्या ऐसे अपराध रोके जा सकते हैं। कोई भी आदमी अगला कदम क्या उठाएगा? कोई कैसे जान सकता है। विपक्ष को इस बात को समझना चाहिए।