अशोक मिश्रसामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अब लोग जागरूक होने लगे हैं। धार्मिक, सामाजिक क्षेत्र में जितनी भी कुरीतियां हैं, लोग अब उसके खिलाफ स्वर बुलंद करने लगे हैं। शादी-विवाह सहित सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में लोगों ने देश और समाज को नुकसान पहुंचाने वाली रीतियों, परपंराओं से निजात पानी शुरू कर दी है। इसके लिए अब पंचायतें भी सामने आने लगी हैं।
प्रदेश में सामाजिक बदलाव की बहने वाली बयार के पीछे जागरूक स्त्री और पुरुष दोनों हैं। फतेहाबाद जिले की बड़ोपल पंचायत ने प्रस्ताव पास किया है कि अब वह बाल विवाह नहीं होने देंगे। जो भी बाल विवाह कराता हुआ पाया जाएगा, उसके यहां होने वाले विवाह में बान पर नहीं बैठेंगे और हल्दी की रस्म नहीं निभाई जाएगी। पंचायत ने भी यह तय किया कि यदि किसी ने पंचायत के फैसले के खिलाफ जाकर बाल विवाह कराने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी, पंचायत में बारात नहीं आने दिया जाएगा और यदि किसी ने गुपचुप बाल विवाह करने की सोची, तो उसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की जाएगी।
जरूरत पड़ने पर दूसरे गांवों की पंचायतों का भी सहयोग लिया जाएगा। कभी हमारे देश और प्रदेश में बाल विवाह जैसी कुप्रथा थी। इसे सामाजिक मान्यता भी हासिल की थी, लेकिन जैसे-जैसे समाज शिक्षित हुआ, जागरूर हुआ, लोगों को बाल विवाह से होने वाली परेशानियां और नुकसान की बात समझ में आने लगी। प्रदेश की बहुसंख्यक आबादी ने बाल विवाह से अपना मुंह मोड़ लिया, लेकिन कुछ लोग अभी बाल विवाह को उचित मानकर अपने बेटा-बेटी का बाल विवाह कराते हैं।
प्रदेश के मामले में अच्छी बात यह है कि पंचायतों ने अब शादी-विवाह में होने वाले बेतुके खर्चों पर भी रोक लगानी शुरू कर दी है। फरीदाबाद के बल्लभगढ़ में पिछले दिनों आयोजित पंचायत में फैसला लिया गया है कि शादी-विवाह या अन्य दूसरे मांगलिक कार्यों के समय बजाए जाने वाली डीजे का बहिष्कार किया जाएगा। पूरे जिले के गांवों, कालोनियों और सेक्टरों से आए प्रतिनिधियों ने पूरे दस सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने का संकल्प लिया। लोगों को मानना था कि शादी-विवाह के समय कई परंपराएं पुराने समय के हिसाब से शुरू हुई थीं। अब इन परंपराओं का कोई औचित्य नहीं रह गया है।
कुछ परंपराएं ऐसी हैं जिनकी वजह से वर और वधू पक्ष के खर्चे अनावश्यक रूप से बढ़ जाते हैं और जिनका कोई औचित्य भी नहीं है। शादी-विवाह में बहुत तेज आवाज में बजने वाले डीजे की वजह से कई बार पड़ोसियों से मारपीट जैसी घटनाएं हो जाती हैं। बहुत ज्यादा शोर मचाने वाले डीजे जहां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं खर्चा भी बहुत ज्यादा आता है। यही नहीं, फैसला यह भी किया गया कि शादी, लगन-सगाई और अन्य रस्मों में खर्च लेने की प्रथा को बंद किया जाएगा।

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