Wednesday, February 11, 2026

नीमका जेल में बंदी की हत्या ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल


अशोक मिश्र

तबलीगी जमात से जुड़े आतंकी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद के नीमका जेल में हत्या हो गई। इस जेल को प्रदेश की सबसे सुरक्षित जेलों में से एक माना जाता है। सुरक्षित कही जाने वाली इस जेल में जम्मू-कश्मीर के 50 से ज्यादा हार्डकोर बंदियों को रखा गया है। यह ऐसे बंदी हैं जिन पर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होने से लेकर देश के खिलाफ साजिश रचने तक के आरोप हैं। ऐसी सुरक्षित जेल में किसी अपराधी की हत्या हो जाना जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। 

आतंकी अब्दुल रहमान को स्पेशल सेल में रखा गया था जिसमें  हत्या का आरोपी अरुण चौधरी भी बंद था। इन दोनों के अलावा एक और बंदी सोहेब रियाज भी था। कहा जा रहा है कि हत्या के आरोप में बंद अरुण चौधरी ने रहमान की हत्या के लिए पहले एक पत्थर को खोजा, फिर उसे नुकीला बनाया और फिर उस नुकीले पत्थर को सर पर मारकर हत्या कर दी। संदिग्ध आतंकी अब्दुल रहमान की हत्या के आरोपी पर पहले से ही हत्या का मुकदमा चल रहा था। 

उसे अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर की कठुआ जेल से फरीदाबाद की नीमका जेल में ट्रांसफर किया गया था। मारे गए संदिग्ध आतंकी रहमान के मामले में अभी तक एक भी गवाही नहीं हुई है, ऐसा कहा जा रहा है। रहमान को गुजरात एसटीएस और हरियाणा एसटीएस के संयुक्त प्रयास से 2 मार्च 2025 में गिरफ्तार किया गया था। रहमान पर आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के साथ-साथ अयोध्या में बने राम मंदिर को उड़ाने की साजिश रचने का भी आरोप था। 

जांच में पता चला था कि अब्दुल लगभग डेढ़ साल तक सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो अपलोड करता था। जब सोशल मीडिया एकाउंट बंद कर दिया गया, तो उसने इंस्टाग्राम पर भड़काऊ वीडियो डालना शुरू कर दिया था। इसके बाद इसकी गतिविधियों पर पुलिस की नजर पड़ी और गुजरात एसटीएस के साथ हरियाणा एसटीएस ने संयुक्त टीम बनाकर इसे गिरफ्तार कर लिया था। नीमका जेल में इससे पहले भी कई तरह की अनियमितताएं पाई गई थीं। नीमका जेल में 19 जून 2013 में पांच-पांच हजार रुपये लेकर बाहर से दो मोबाइल और चार्जर मंगाने का आरोप जेल वार्डन पर लगा था। 

इसके कुछ ही दिन बाद दो बंदियों के पास से दो मोबाइल फोन, चार्जर, सिम और बैटरी बरामद हुई थी। दिसंबर 2019 में भी इसी तरह की घटना नीमका जेल में हुई थी। क्राइम ब्रांच पुलिस ने कई घंटे की खोजबीन के बाद पांच मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए थे। इसी जेल में जून 2011 में दो कुख्यात अपराधी आपस में लड़ बैठे थे। इस घटना के विरोध में एक बंदी के परिवार वालों ने जेल के बाहर प्रदर्शन भी किया था। ऐसी सुरक्षित जेल में किसी बंदी की हत्या हो जाना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल देती है।

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