अशोक मिश्रसाइबर ठगी के मामले हरियाणा में बढ़ते जा रहे हैं। साइबर ठगों की कार्यप्रणाली को देखते हुए लोग अब अनजान नंबर से आने वाले फोन को उठाना बंद करने लगे हैं। इसके चलते कई बार वाजिब नंबर से आने वाले फोन भी अटेंड नहीं हो पाते हैं। लोग यही सोचकर फोन कॉल को टाल देते हैं, क्या पता ठगों का ही फोन हो और ऐसे में जरूरी कॉल भी अटेंड होने से रह जाती है। इन तमाम सावधानियों के बाद भी बहुत सारे लोग हैं जो इन साइबर ठगों के चंगुल में फंस ही जाते हैं।
हरियाणा का शायद ही कोई ऐसा जिला हो, जहां से रोज एकाध खबर साइबर ठगी की न आती हो। फरीदाबाद में ही साइबर ठगों ने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर साठ हजार रुपये से अधिक ठग लिए। साइबर ठगों ने अपने शिकार को क्रेडिट कार्ड बढ़ाने का आश्वासन दिया और लिंक भेजकर उसमें डिटेल भरने को कहा। जैसे ही पीड़ित व्यक्ति ने उस लिंक को खोला, उसके खाते से पैसे कट गए।
बल्लभगढ़ में ही एक फर्नीचर व्यापारी से दुबई टूर की व्यवस्था के नाम पर करीब साढ़े छह लाख रुपये ठग लिए गए। व्यापारी को अपने परिवार के साथ दुबई टूर पर जाना था। दुबई जाने के लिए व्यापारी वेबसाइट पर टूर पैकेज तलाश रहा था, उसी पर उसे एक नंबर मिला। उस पर बातचीत करने पर उस व्यक्ति ने एक टूर पैकेज भेजा। व्यापारी ने छह लाख चौबीस हजार रुपये भी अलग-अलग किस्तों में जमा कर दिया।
नियत समय पर जब व्यापारी अपने परिवार के साथ दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचा तो पता चला कि साथ जा रही एक लड़की का वीजा फर्जी है। टूर पैकेज के नाम पर बेबसाइट से बात करने वाले व्यक्ति ने दो दिन बाद वीजा बनवाकर देने और दो दिन बाद की फ्लाइट से सीटें बुक करने का आश्वासन दिया। इसके बाद आरोपियों के फोन बंद आ रहे है। फर्नीचर व्यापारी ने इसकी पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करा दी है।
स्वाभाविक है कि पुलिस अब अपना काम करेगी। हरियाणा पुलिस ही नहीं, देश भर की सरकारें, वहां के पुलिस अधिकारी, सुप्रीमकोर्ट और यहां तक कि पीएम नरेंद्र मोदी लोगों को साइबर अरेस्ट, डिजिटल ठगी और अन्य साइबर क्राइम के बार में देशवासियों को सचेत कर चुके हैं। आज भी कर रहे हैं और शायद भविष्य में भी लोगों को सचेत करते रहेंगे, इसके बावजूद ऐसी घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ऐसी स्थिति में एक ही बात समझ में आती है कि इन घटनाओं के पीछे भय या लालच काम करता है।
जब पुलिस बार-बार यह दोहरा रही है कि वह किसी भी मामले में न तो टेलीफोन, मोबाइल फोन या वीडियो कॉल करके किसी बारे में चर्चा नहीं करती है, तो फिर पता नहीं क्यों लोग साइबर अरेस्ट हो जाते हैं। अपने पैसे को दो गुना करने या जिस व्यक्ति से कभी मिले नहीं हैं, उस पर कैसे विश्वास करके लाखों रुपये ट्रांसफर कर देते हैं।

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