Wednesday, April 22, 2026

बाढ़ से निपटने की तैयारियों में अभी से जुटी हरियाणा सरकार


अशोक मिश्र

अभी बरसात का मौसम आने में दो-ढाई महीने की देरी है, लेकिन सैनी सरकार ने यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने पर हरियाणा के निचले जिलों में पानी भर जाने की आशंका के चलते अभी से तैयारियों करने का निर्देश दिया है। वैसे तो सैनी सरकार ने जनवरी में ही नदी तटबंधों की मरम्मत और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी सभी परियोजनाओं की नियमित मानीटरिंग करने को कहा था। 

जनवरी में ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 388 बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए 637 करोड़ की मंजूरी भी प्रदान कर दी थी। इसमें जिला उपायुक्तों द्वारा प्रस्तावित की गई 102 करोड़ रुपये की 59 परियोजनाएं भी शामिल थीं। शासन स्तर पर इस बार पहले से ही चौकसी बरतने की तैयारी है ताकि पिछले साल अगस्त में हरियाणा और पंजाब में आई बाढ़ से हुए नुकसान की कहानी दोहराई न जा सके। 

यही वजह है कि इस बार बाढ़ जैसी समस्या का स्थायी समाधान करने की तैयारी की जा रही है। हरियाणा के कई जिलों में तालाब निर्माण, नदियों की सुरक्षा दीवारों को मजबूत करने से लेकर रेस्क्यू बोट की मरम्मत आदि शुरू हो चुकी है। सरकार ने यमुना नदी के किनारे बसे संवेदनशील गांवों में रेस्क्यू और राहत कार्यों को मजबूत करने पर जोर दिया है। इसके तहत 15 फीट लंबी एल्युमीनियम की नाव पहले से तैयार रखी जाएंगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। 

इन नाव के जरिये जलभराव या बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही राहत टीमों को भी मौके पर तेजी से काम करने में मदद मिलेगी। सरकार ने  प्रशासन के सामने साफ तौर पर लक्ष्य निर्धारित कर दिया है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी काम पूरे कर लिए जाएं। तालाब, सुरक्षा दीवार और रेस्क्यू व्यवस्था पूरी तरह तैयार रखे जाएं ताकि बरसात के दिनों में निचले इलाकों में पानी भर जाने पर वहां के लोगों को तत्काल फायदा पहुंचाया जा सके। 

ज्यादा बारिश होने पर यदि इन इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा होती है, तो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। हरियाणा के कई जिलों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। फसलों को काफी नुकसान हुआ था। किसानों के सामने तो भूखों मरने तक की नौबत आ गई थी। बाढ़ के चलते खड़ी फसलों का नुकसान तो हुआ ही था, खेतों में काफी दिनों तक पानी भरा रहने की वजह से अगली फसल बोने में भी काफी देरी हुई। 

कई जगहों पर तो नमी ज्यादा होने की वजह से बीज अंकुरित कम हुए या बिल्कुल ही नहीं हुए। सैनी सरकार ऐसी स्थिति दोबारा नहीं चाहती है। यही कारण है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में ताबाल निर्माण करवाकर बाढ़ के प्रभाव को कम करना चाहती है। तालाब निर्माण से इलाके का जलस्तर भी  बढ़ेगा और लोगों को अपनी जरूरतों के लिए पानी भी समय पर उपलब्ध हो सकेगा।

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