अशोक मिश्रआतंकवाद एक वैश्विक समस्या है। इसके पीछे कुछ राष्ट्रों का हित छिपा हुआ है जिसको वह समय-समय पर हैं। ऐसे ही देशों में पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर है। पाकिस्तान हमेशा भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल रहता है। वह अपने देश में आतंकियों को प्रशिक्षण देकर भारत में आतंकी कार्रवाई के लिए भेज देता है। उसके एजेंट भारत में आकर नए आतंकी तैयार करने की कोशिश करते हैं।
हालांकि भारतीय खुफिया एजेंसियां उनके नापाक मनसूबों को सफल नहीं होने देती हैं। हरियाणा में भी पाकिस्तानी एजेंट और आतंकी अपना पैर पसारने की फिराक में रहते हैं। हरियाणा के दो जिलों पलवल और नूंह में एनआईए और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रूप से आठ युवकों को हिरासत में लिया है। इन पर पाकिस्तानी एजेंटों को खुफिया जानकारी देने का शक है। पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है। हरियाणा में पाकिस्तान के लिए कथित रूप से काम करने वाले इन एजेंटों की जानकारी जम्मू-कश्मीर में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए एक युवक से पूछताछ के दौरान मिली।
यह जानकारी मिलने के बाद एनआईए यानी राष्ट्रीय जांच एजेंसी सक्रिय हुई और हथीन क्षेत्र के पावसर गांव से तीन और नूंह के तावड़ू इलाके से करीब पांच युवकों को हिरासत में लिया गया। इसी बीच जानकारी मिली कि पाकिस्तान से जुड़ा एक जासूस लंबे समय से हथीन और नूंह के कुछ गांवों में सक्रिय था। वह स्थानीय युवकों से संपर्क कर धीरे-धीरे अपना नेटवर्क तैयार कर रहा था। दरअसल, हरियाणा के कुछ जिले पहले भी पाकिस्तानी जासूसों के नेटवर्कके लिए चिह्नित किए जा चुके हैं।
उनमें पलवल और नूंह खासतौर पर भारतीय खुफिया एजेंसियों के निशाने पर हैं। पिछले ही महीने 14 मार्च को गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में महिला सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। ये लोग रेलवे स्टेशन, सैन्य ठिकानों और अन्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी तक पहुंचा रहे थे। पिछले वर्ष 28 सितंबर को क्राइम ब्रांच ने आलीमेव निवासी तौफीक को पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। उस पर भारतीय सूचनाएं पाकिस्तान दूतावास के एक अधिकारी तक पहुंचाने का आरोप था। उसने पाकिस्तानी की यात्रा भी की थी।
इसके अलावा यूट्यूबर वसीम अकरम को भी कोट क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था, जो कथित तौर पर पाक दूतावास के कर्मचारी दानिश के संपर्क में था। नवंबर महीने में दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट मामले में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े तीन प्रोफेसर गिरफ्तार किए गए थे। इनके खिलाफ आतंकी गतिविधियों में भाग लेने और युवाओं को आतंकी बनने की ट्रेनिंग देने का आरोप था। लेकिन भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इनको गिरफ्तार करके इनके मनसूबों पर पानी फेर दिया था।

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