नतीजा यह हुआ कि टक्कर लगने से कुलबीर आगे की ओर उछले और कार के बोनट पर लटक गए। चालक काफी दूर तक कुलबीर को बोनट पर लटकाकर ले गया। किसी तरह जान बचाकर कुलबीर बोनट से उतरा। इसी बीच कुछ लोगों ने घटना की वीडियो बना ली। मामले की रिपोर्ट दर्ज होने के सात दिन बाद नाबालिग कार चालक को गिरफ्तार कर लिया गया है।
कहा जाता है कि घटना के वक्त कार में एक लड़की भी थी। नाबालिग के इस आचरण से साफ पता चलता है कि आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जेड को किसी कायदे-कानून की फिक्र नहीं है। उन्हें मालूम है कि यदि उनसे कुछ गलत भी हो गया, तो उनके मां-बाप उन्हें बचाने में अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे। इस तरह के मामलों में दोषी पाए गए कुछ युवाओं को अपने अमीर मां-बाप पर बहुत ज्यादा भरोसा होता है। वैसे भी कई जेन जेड युवाओं को 'हेलिकॉप्टर पेरेंट्स' यानी अत्यधिक सुरक्षा देने वाले माता-पिता ने पाला होता है।
इससे उनकी आत्म निर्भरता की कमी आ जाती है, लेकिन वह अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए भी अपने परिजनों पर निर्भर होकर रह जाते हैं। उनके माता-पिता भी अपने व्यवहार से यह एहसास दिलाते रहते हैं कि वे स्पेशल हैं। इसका नतीजा यह होता है कि वह काफी हद तक लापरवाह और जिद्दी हो जाते हैं। इस वजह से उनमें 'एंटाइटेलमेंट' यानी हर चीज पर हक जताने का भाव पैदा हो जाता है। यही भाव जेन जेड को लापरवाह बना देता है।
जेन जेड के मामले में अक्सर यह देखा गया है कि उनमें पैदा हुई लापरवाही उनके मानसिक थकान का परिणाम होती है। नई पीढ़ी के सोशल मीडिया और इंटरनेट ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की वजह से इन्हें अगर किसी चीज की जरूरत है, तो वह चीज तुरंत चाहिए। धैर्य की कमी इनके व्यवहार में लापरवाही के रूप में दिखती है। हमेशा आॅनलाइन रहने के कारण, दूसरों के जीवन की तुलना अपने वास्तविक जीवन से करने से यह पीढ़ी चिंता, अवसाद और सामाजिक अलगाव का शिकार हो रही है। यही वजह है कि नई पीढ़ी हर मामले में लापरवाह दिख रही है। सड़क पर वाहन चलाने के मामले में भी।

No comments:
Post a Comment