Friday, April 3, 2026

कड़े फैसले लिए बिना हरियाणा में कभी साफ नहीं होगी यमुना


अशोक मिश्र

जब भी दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में चुनाव होते हैं, यमुना की गंदगी का मुद्दा जरूर उठता है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में यमुना नदी की स्वच्छता को लेकर खूब चर्चा हुई थी। आप सरकार के दौरान झाग वाली यमुना को लेकर खूब आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए थे। 

वैसे तो यमुना नदी आज भी दिल्ली और हरियाणा में साफ नहीं है, लेकिन हरियाणा सरकार ने अपने क्षेत्र में बहने वाली यमुना को स्वच्छ बनाने का मन बना लिया है। यमुना नगर के कलेसर जंगल से लेकर पलवल के हसनपुर के बीच 320 से 328 किमी लंबाई में बहने वाली यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का फैसला सैनी सरकार ने लिया है। इसके लिए एक विशेष मिशन चलाने पर फैसला लिया गया है। 

प्रदेश सरकार की योजना है कि वर्ष 2926-27 के बीच यमुना में गिरने वाले सभी नालों के जल का वैज्ञानिक उपचार सुनिश्चित किया जाए जिससे नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त किया जा सके। इसके लिए यमुना नदी में मिलने वाले सभी नालों की मैपिंग कराई जाएगी। इसके लिए जरूरी है कि तीन महीने के भीतर सभी नालों और प्रदूषण पैदा करने वाले बिंदुओं की पहचान की जाए ताकि यमुना नदी को पुराने स्वरूप में लौटाया जा सके। हरियाणा में 463 एमएलडी तक बिना ट्रीटमेंट किया हुआ गंदा पानी यमुना में गिराया जा रहा है। 

हरियाणा में इन दिनों 90 एसटीपी काम कर रहे हैं। इन सीवेट ट्रीटमेंट प्लांट की कुल क्षमता 1518 एमएलडी है। इनमें से 62 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी केवल यमुना में मिलने वाले जल को शोधित करने में ही लगे हुए हैं। लेकिन यह सभी एसटीपी मानकों पर खरे नहीं उतर रहे हैं। कुछ एसटीपी की कार्य क्षमता आंशिक है। बाहशाहपुर ड्रेन क्षेत्र समेत कई क्षेत्रों में तो अभी एसटीपी लगाए ही नहीं गए हैं। यही वजह है कि 463 एमएलडी प्रदूषित जल यमुना में मिलाया जा रहा है। इन हालात को देखते हुए सरकार ने सभी खराब एसटीपी की तुंरत मरम्मत करने का फैसला लिया है। 

इस कार्य में नई क्षमता वाली एसटीपी को जोड़ा जाएगा ताकि हरियाणा में बहने वाली यमुना नदी में मिलने वाले जल को प्रदूषण रहित बनाया जा सके। प्रदेश में ड्रेन नंबर छह समेत कई ड्रेन और 117 औद्योगिक इकाइयां यमुना नदी में प्रदूषित जल डाल रही हैं। इन्हें सरकार ने चिह्नित किया है। इन औद्योगिक इकाइयों सहित नालों से होकर यमुना में मिलने वाले प्रदूषित जल को रोकने के लिए अब कड़े कदम उठाए जाएंगे। अब औद्योगिक इकाइयों को एसटीपी से जोड़ना  अनिवार्य किया जाएगा। 

यमुना नदी में रासायनिक कचरा डालने या बहाने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध डिस्चार्ज पर इन इकाइयों पर जुर्माना लगाने या बंद कर देने का भी प्रदेश सरकार ने फैसला किया है। यमुना नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए कड़े फैसले लेने पर सरकार को मजबूर होना पड़ेगा।

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