Sunday, April 26, 2026

यमुना नदी को अगले साल के आखिर तक प्रदूषण मुक्त बनाने की योजना


अशोक मिश्र

देश की सबसे प्रदूषित नदियों में पहला नाम यमुना नदी का है। दिल्ली और आगरा के बीच यमुना नदी का पानी तो छूने लायक भी नहीं रह जाता है। दिल्ली में ही 50 प्रतिशत से अधिक कचरा और औद्योगिक गंदगी मिल जाती है। यहाँ जहरीला फोम यानी झाग बनना आम है। किसी भी महीने में दिल्ली में यमुना नदी के किनारे पहुंच जाएं, तो पानी के ऊपर तैरता झाग दिख जाएगा। इस प्रदूषण के लिए अकेले दिल्ली ही जिम्मेदार नहीं है, इसके लिए हरियाणा भी जिम्मेदार है। 

यही वजह है कि हरियाणा सरकार समय समय पर यमुना नदी की सफाई को लेकर अभियान चलाती रहती है, लेकिन उसके अभियान को नदी में औद्योगिक कचरा और अन्य रासायनिक अपशिष्ट मिलाने वाले उद्योग नाकाम बना देते हैं। यमुना नदी की दशा और दुर्दशा से चिंतित मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक बार फिर अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह नियमों का उल्लंघन कर यमुना में दूषित पानी छोड़ने वाले उद्योगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। 

यमुना नगर के कलेसर जंगल से लेकर पलवल के हसनपुर के बीच 320 से 328 किमी लंबाई में बहने वाली यमुना को प्रदूषण मुक्त करने का फैसला सैनी सरकार ने लिया है। यमुना नदी को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में सीएम सैनी ने अपना इरादा जाहिर करते हुए कहा कि राज्य सरकार अगले साल यानी 2027 के अंत तक यमुना नदी को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना चाहती है। इसके लिए जो भी कार्रवाई आवश्यक होगी, वह कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी विभागों को आपसी सामंजस्य के साथ तेजी से कार्रवाई करनी होगी। 

आंकड़े बताते हैं कि इन दिनों यमुना नदी कैचमेंट एरिया में 1543 एलएमडी क्षमता के 91 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं। इनमें से 41 एसटीपी पिछले पांच साल से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 11 नए एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। इससे यमुना कैचमेंट एरिया में प्रदूषित जलशोधन की क्षमता में बढ़ोतरी होगी। सीएम ने बैठक में यहां तक कहा कि यमुना नदी को साफ रखने के लिए जहां भी जरूरत होगी, वहां औद्योगिक अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र (ईटीपी) और सामान्य अपशिष्ट उपचार केंद्र (सीईटीपी) स्थापित किए जाएंगे। 

प्रदेश में ड्रेन नंबर छह समेत कई ड्रेन और 117 औद्योगिक इकाइयां यमुना नदी में प्रदूषित जल डाल रही हैं। इन्हें सरकार ने चिह्नित किया है। इन औद्योगिक इकाइयों सहित नालों से होकर यमुना में मिलने वाले प्रदूषित जल को रोकने के लिए अब कड़े कदम उठाए जाएंगे। अब औद्योगिक इकाइयों को एसटीपी से जोड़ना  अनिवार्य किया जाएगा। यमुना नदी में रासायनिक कचरा डालने या बहाने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अवैध डिस्चार्ज पर इन इकाइयों पर जुर्माना लगाने या बंद कर देने का भी प्रदेश सरकार ने फैसला किया है।

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