Monday, April 20, 2026

आखिर कब रुकेगी कापी-किताब, ड्रेस के नाम पर निजी स्कूलों की लूट

अशोक मिश्र

वैसे तो सरकार हर साल जब स्कूलों का नया सत्र शुरू होता है, तो दावा करती है कि अभिभावकों को स्कूलों द्वारा की जा रही मनमानी और लूट से बचाया जाएगा। अभिभावकों के साथ लूट नहीं होने दी जाएगी, लेकिन कुछ दिनों तक संबंधित अधिकारी चुस्ती-फुर्ती दिखाते हैं और फिर सब कुछ ठंडा पड़ जाता है। इस साल भी प्रदेश सरकार अभिभावकों को निश्चित दुकानों से ड्रेस और कापी-किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहे निजी स्कूलों पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है। 

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि निजी स्कूलों में किसी बच्चे की पीठ पर लदे बैग में निर्धारित भार से अधिक कापी-किताबें पाई गईं, तो उस स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को ऐसी परेशानी से निजात दिलाने और स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए जिला शिक्षाधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारी की जवाबदेही तय कर दी गई है। सरकार ने पहली कक्षा से लेकर दसवीं तक के बच्चों के लिए एक मानक भार तय कर दिया है। 

लेकिन अकसर देखा गया है कि रेफरेंस बुक के नाम पर अभिभावकों को इतनी ज्यादा मात्रा में पुस्तकें खरीदने पर मजबूर किया जाता है कि वह परेशान हो जाते हैं। बस्ते का बोझ भी काफी हद तक बढ़ जाता है। छोटे-छोटे बच्चों की पीठ पर लदा भारी भरकम बस्ता उनके लिए कई तरह की मुसीबतें पैदा कर देता है। अधिकतर बच्चे छोटी ही उम्र में पीठ दर्द की शिकायत करते हुए पाए जाते हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी भी पीठ पर भारी बस्ता लादने की वजह से थोड़ी झुक जाती है। 

यह स्थिति आगे चलकर उन्हें जीवन भर परेशान करती है। कई जिलों में स्कूल परिसर में स्कूल प्रबंधन ने मनमााने रेट पर पुस्तकों और ड्रेस आदि बेचना शुरू कर दिया है। माता-पिता को स्कूल से ही जरूरत की सारी चीजें लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है। कई पुराने और अप्रासंगिक रेफरेंस बुक्स बच्चों पर थोपी जा रही हैं जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा के अनुरूप नहीं बताई जाती हैं। वैसे तो शिक्षा विभाग ने ऐसे मामलों पर शिकायत मिलने के बाद जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कुछ मामलों में कार्रवाई हुई भी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

 इसके लिए पूरे प्रदेश स्तर पर कम से कम डेढ़ दो महीने तक लगातार अभियान चलाने की जरूरत है। हालांकि नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने के सख्त आदेश दिए गए हैं। कुछ स्कूलों ने इस बार अपनी ड्रेस में भी बदलाव कर दिया है। हर साल स्कूल ड्रेस में बदलाव होने से अभिभावकों पर एक अतिरिक्त बोझ पड़ जाता है, जबकि पुरानी ड्रेस जारी रखकर अभिभावकों को अतिरिक्त खर्चे से बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसी स्थिति में निजी स्कूलों को अतिरिक्त कमाई नहीं हो पाएगी।

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